ऋषिकेश की पावन धरा से गूंजा विप्र शक्ति का शंखनाद: स्वामी अवधेशानंद गिरि ने दिया ब्राह्मणत्व के उत्थान का 'आरोहण मंत्र'
ऋषिकेश में विप्र फाउंडेशन के 'आरोहण नायक प्रशिक्षण शिविर' में जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ब्राह्मणत्व को उदार विचार बताते हुए समाज को साथ लेकर चलने का आह्वान किया। भीलवाड़ा सहित देशभर के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संगठन के 'फाइव-जी' प्रोजेक्ट और भावी लक्ष्यों पर चर्चा हुई। नेतृत्व और संस्कार के संगम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

ऋषिकेश/भीलवाड़ा। देवभूमि ऋषिकेश के पावन सानिध्य में मानवता और सनातन संस्कृति के ध्वजवाहकों का एक ऐसा समागम हुआ, जिसने आने वाले युग के लिए नेतृत्व की नई परिभाषा लिख दी है। विप्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य 'आरोहण नायक प्रशिक्षण शिविर' के समापन पर जूना पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से ब्राह्मणत्व की आत्मा को झंकृत कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण कोई जातिगत पहचान मात्र नहीं, बल्कि वह उदार विचार है जिसकी दृष्टि आकाश की व्यापकता और हृदय सागर की गहराई समेटे हुए है। स्वामी जी ने शिविर में उपस्थित प्रतिनिधियों को वह 'आरोहण मंत्र' दिया, जो समाज को एक सूत्र में पिरोने और सनातन परंपराओं के पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत इस सत्र को संबोधित करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ब्राह्मण को ईश्वर की प्रथम कृति 'सृजन' का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ब्रह्मा समभाव से सृष्टि का संचालन करते हैं, उसी प्रकार ब्राह्मण वह 'अजातशत्रु' है जो अहंकार और भेदों से ऊपर उठकर समस्त सनातनियों का नेतृत्व करने की सामर्थ्य रखता है। उन्होंने ब्राह्मणों से अपनी सांस्कृतिक पहचान जैसे तिलक, शिखा, रक्षा सूत्र और उपनयन को गौरव के साथ धारण करने का आह्वान किया। स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि आज विश्व की शीर्ष कंपनियों का नेतृत्व ब्राह्मण मेधा कर रही है, और यदि ब्राह्मण समाज संस्कारवान होकर आगे बढ़ेगा, तो समूचा राष्ट्र और विश्व प्रगति के पथ पर स्वतः अग्रसर हो जाएगा।
संगठन की भविष्यगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने बताया कि पूर्व में परशुराम कुंड पर 54 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना और जयपुर में परशुराम भवन का निर्माण संस्था के स्वप्निल प्रोजेक्ट्स हैं। उन्होंने संगठन के 'फाइव-जी' (गौ, गायत्री, गीता, गंगा और गोरी) प्रोजेक्ट सहित बीस सूत्रीय कार्यक्रमों का खाका खींचा, जिसकी स्वामी जी ने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष राधेश्याम गुरुजी ने संकल्प लिया कि संगठन का प्रत्येक सदस्य स्वामी जी द्वारा दिए गए मूलमंत्रों को जीवन में उतारेगा। इस भव्य आयोजन में नरेंद्र हर्ष ने आभार व्यक्त किया, जबकि 'नेतृत्व आरोहण' सत्र में सामाजिक विचारक बाबूलाल की गरिमामयी उपस्थिति रही और अध्यक्षता सत्यनारायण श्रीमाली ने की। सत्र का सफल संचालन शिव शर्मा ने और आभार प्रदर्शन पूनम शर्मा ने किया।
शिविर के दीक्षांत सत्र का वैभव भी अद्वितीय रहा, जिसकी अध्यक्षता आर.बी. शर्मा (संभाजी नगर) ने की और मुख्य अतिथि के रूप में युवाचार्य अभयदास महाराज ने मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर बाबूलाल पारीक, विनोद अमन और परमेश्वर शर्मा बतौर अतिथि उपस्थित रहे, जबकि संचालन श्रीकिशन जोशी (मुंबई) व आभार नवीन जोशी (जोधपुर) ने ज्ञापित किया। समापन सत्र 'नव गति नव लय, ताल छन्द नव' में नीति आयोग उत्तराखंड के राज शेखर जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में आधुनिक परिप्रेक्ष्य में ब्राह्मणों की भूमिका पर विचार रखे, जहाँ विधायक किशोर उपाध्याय की विशिष्ट उपस्थिति रही। इस ऐतिहासिक सत्र की प्रस्ताव घोषणा डॉ. सीए सुनील शर्मा (मुंबई) ने की और संचालन मनोज पांडे (जयपुर) ने संभाला। भीलवाड़ा से आए प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश महामंत्री दिनेश शर्मा, जिलाध्यक्ष तुलसीराम शर्मा के मार्गदर्शन में युवा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण व्यास, उपाध्यक्ष देवेन्द्र सारस्वत और महासचिव अभिषेक शर्मा ने प्रशिक्षण प्राप्त कर समाज सेवा का नया संकल्प लिया। यह शिविर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन समाज की एकता और बौद्धिक नेतृत्व के नए युग का सूत्रपात सिद्ध हुआ है।

