भीलवाड़ा से उठी गौ सेवा की हुंकार: 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले शक्ति सिंह का नासिक में ऐतिहासिक स्वागत
भीलवाड़ा के शक्ति सिंह राणावत 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पर हैं। 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की इस यात्रा का उद्देश्य गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाना है। नासिक में रतन सिंह, किशन सिंह और नानूराम तेली की उपस्थिति में उनका भव्य स्वागत हुआ। जानिए इस महाभियान और 27 अप्रैल को होने वाले राष्ट्रव्यापी गौ सम्मान आंदोलन के बारे में पूरी जानकारी।

नासिक/भीलवाड़ा। अटूट संकल्प, पैरों में छाले और हृदय में गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने की अटूट लौ लेकर निकले भीलवाड़ा के लाल शक्ति सिंह राणावत का महाराष्ट्र की पावन धरा नासिक पहुँचने पर भव्य अभिनंदन किया गया। यह केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और गौ संरक्षण के प्रति जागृति का एक ऐसा महायज्ञ है, जिसकी गूँज अब पूरे देश में सुनाई देने लगी है। 17 हजार किलोमीटर के इस दुर्गम सफर पर निकले शक्ति सिंह का लक्ष्य देश के 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धामों की चौखट पर मत्था टेककर गौ सेवा का अलख जगाना है।
भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष नानूराम तेली ने इस यात्रा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शक्ति सिंह राणावत की यह साहसिक यात्रा लगभग 16 से 17 हजार किलोमीटर की परिधि को कवर करेगी। इस लंबी और कठिन डगर का मुख्य उद्देश्य देशभर में गौ संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाना और गौ माता को संवैधानिक रूप से 'राष्ट्र माता' का सम्मान दिलाना है। तेली ने इस अवसर पर 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' की महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 27 अप्रैल, सोमवार को भारत की प्रत्येक तहसील में गौ माता के सम्मान हेतु प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। उन्होंने शक्ति सिंह से विशेष आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान इस अभियान की जानकारी हर भारतवासी तक पहुँचाएं, ताकि देश का हर नागरिक इस पवित्र मुहिम का हिस्सा बन सके।
नासिक में आयोजित इस गरिमामयी स्वागत कार्यक्रम के दौरान प्रवासी राजस्थानियों और गौ भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में रतन सिंह और किशन सिंह सहित कई गणमान्य प्रवासी राजस्थानी उपस्थित रहे, जिन्होंने शक्ति सिंह के अदम्य साहस और गौ सेवा के प्रति उनके समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। उपस्थित जनसमूह ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ शक्ति सिंह का हौसला बढ़ाया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आधुनिक समय में गौ माता की महत्ता को पुनर्स्थापित करने की एक वैचारिक क्रांति बनती जा रही है। शक्ति सिंह का यह संकल्प आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाता है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

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