भीलवाड़ा में मौत का 'खूनी' धागा: चायनीज मांझे से संगीता की गर्दन पर आया गहरा घाव, 10 टांकों ने बचाई जान
भीलवाड़ा में प्रतिबंधित चायनीज मांझे का कहर! संजय कॉलोनी निवासी संगीता न्याती की गर्दन मांझे की चपेट में आने से बुरी तरह कट गई। दूधाधारी मंदिर के पास हुए इस हादसे में डॉ. योगेश दरगड और डॉ. विभा जैन ने 10 टांके लगाकर महिला की जान बचाई। जानिए कैसे एक लापरवाही जानलेवा साबित होते-होते बची और क्यों प्रशासन के दावों पर उठ रहे हैं सवाल।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहा चायनीज मांझा एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को निगलने को उतारू दिखा। शहर की संजय कॉलोनी में रहने वाली 38 वर्षीया संगीता न्याती के लिए गुरुवार की दोपहर काल बनकर आई, जब महज एक चाय देने जाने के सफर में उनकी गर्दन और मौत के बीच केवल चंद मिलीमीटर का फासला रह गया। संगीता अपने पति आशुतोष न्याती की दुकान पर चाय देने जा रही थीं, लेकिन रास्ते में बिछे चायनीज मांझे के जाल ने उन्हें अपना शिकार बना लिया।
यह हृदय विदारक घटना दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सांगानेरी गेट क्षेत्र की है। संगीता न्याती जब घर से निकलकर दूधाधारी मंदिर के बाहर पहुंचीं, तभी अचानक हवा में लहराते हुए प्रतिबंधित चायनीज मांझे ने उनकी गर्दन को अपनी चपेट में ले लिया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पातीं, तेज धार वाले इस धागे ने उनकी गर्दन पर एक लंबा और गहरा चीरा लगा दिया। खून से लथपथ संगीता को देखकर आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया और उन्हें तत्काल गंभीर अवस्था में रामस्नेही चिकित्सालय ले जाया गया।
अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाई। विख्यात सर्जन डॉ. योगेश दरगड एवं नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. विभा जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उपचार शुरू किया। संगीता की गर्दन पर आए गहरे घाव को भरने के लिए चिकित्सकों को 10 टांके लगाने पड़े। चिकित्सकों के अनुसार, घाव काफी गहरा था और यदि मांझा थोड़ा और अंदर तक जाता तो परिणाम बेहद घातक हो सकते थे। वर्तमान में संगीता उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
प्रशासन द्वारा चायनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर कड़े प्रतिबंध के बावजूद इस तरह की घटनाएं व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। भीलवाड़ा में हुई यह घटना एक चेतावनी है कि चंद रुपयों के मुनाफे और मनोरंजन के लिए बेचा जा रहा यह घातक धागा किसी निर्दोष की जान ले सकता है। अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्ती दिखाए और आम नागरिक भी इस 'खूनी खेल' के खिलाफ जागरूक हों, ताकि भविष्य में कोई और संगीता इस दर्दनाक हादसे का शिकार न बने।

Pratahkal Bureau
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