भीलवाड़ा, 9 अगस्त। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में भजन भक्ति का माध्यम है और विश्वास की पराकाष्ठा का नाम भक्ति है। सद्गुरु के वचनों पर विश्वास किए बिना परमात्मा से साक्षात्कार संभव नहीं है। परमात्मा के चरणों में अपने स्वार्थ की याचना करने के बजाय प्यासे को पानी और भूखे को रोटी देने वाले की भक्ति श्रेष्ठ है। भक्ति और भजन का अर्थ सेवा करना है। केवल माला फेरना या नाचना ही भक्ति नहीं, बल्कि पीड़ित और असहाय की सेवा करना भी भक्ति है।



आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने रविवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दृष्टि, दृश्य, दृष्टान्त और दर्शन एक हो जाते हैं तो वह भक्ति की सर्वोच्च अवस्था होती है। हमारी आंख, दिमाग, भाषा और चलने में विकृति होना भी भक्ति का अपमान है। वर्षों तक भक्ति करने के बाद भी यदि हमारा एक प्रण पूरा नहीं होता है तो चिंतन करना चाहिए कि हमारी भक्ति में क्या कमी है।

उन्होंने कहा कि भजन में मन की एकाग्रता नहीं होगी तो वास्तविक भक्ति नहीं होगी। हमारा मन आमोद-प्रमोद में चंचल नहीं होता, लेकिन भक्ति में चंचल हो जाता है। भोजन में मन लग जाता है, पर भजन में मन नहीं लगता। आचार्यश्री ने कहा कि जैसे भोजन बनाकर खाते हैं तो अलग ही स्वाद आता है, उसी तरह भजन बनाकर नाचो-गाओ तो अलग ही आनंद आएगा। भजन से मिलने वाली तृप्ति भोजन करने से नहीं मिल सकती।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि हम परमात्मा की भक्ति तो करते हैं, लेकिन उसका पता क्या है, यह नहीं जानते। परमात्मा का वास कहीं और नहीं, हमारे हृदय में होता है। सूरदास के मंदिर आने पर किसी ने पूछा कि तुम भगवान को देख तो सकते ही नहीं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि आंखें नहीं होने से मैं परमात्मा को नहीं देख सकता, लेकिन परमात्मा तो मुझे देख सकते हैं। इस अवस्था का नाम ही भक्ति है।

रेल के इंजन और डिब्बे का उदाहरण देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि हम सब भक्त अच्छी क्वालिटी के डिब्बे हैं और यदि धर्म, सत्संग व संत रूपी इंजन से जुड़ गए तो भवसागर से बेड़ा पार हो जाएगा। जो जुड़ जाएगा, वह मंजिल तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि हम किसी को सुख नहीं दे सकते तो दुःख मत देना। मंदिर नहीं जा सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन मदिरालय मत जाना। अच्छे स्थान पर नहीं जा सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन बुरे स्थान पर भी मत जाना। अच्छे विचार नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन बुरे विचार भी मत करना। बदल सकना संभव नहीं तो कोई बात नहीं, लेकिन किसी से बदला भी मत लेना। यही भक्ति का वास्तविक स्वरूप है।

आचार्य रामदयालजी महाराज से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। संत रामजस जी ईडर ने भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।



सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान 13 से 19 सितम्बर तक भीलवाड़ा में पहली बार 108 वाणी पाठ का ऐतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे और निरंतर वाणी पाठ करेंगे। ये सभी पाठक पुरुष श्रद्धालु होंगे, जो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से आएंगे। इस अवधि में सुबह 8.30 से 11.30 बजे तक वाणीजी के प्रवचन होंगे। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में वाणीजी की महिमा पूरी नहीं हो सकती, इसलिए इसे वाणी सप्ताह नहीं कहकर वाणी प्रवचन कहा जाएगा। दोपहर में नानी बाई रो मायरा कथा का आयोजन होगा।

एकादशी के अवसर पर रविवार दोपहर आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में रामस्नेही सम्प्रदाय की परम्परा के अनुसार दोपहर 3 से 4 बजे तक वितराग महाराजजी की वाणी का पाठ किया गया। साथ ही छन्द, भुजंगी और भजन भी प्रस्तुत किए गए। शाम को 4 से 5 बजे तक श्वासों श्वास राम नाम साधना मण्डल द्वारा शिविर का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।

चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती तथा रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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