भीलवाड़ा, 27 दिसंबर। शहर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन भव्य एवं भावनात्मक कार्यक्रम के साथ हुआ। कार्यक्रम में सोजत रामद्वारा के रामस्नेही संत श्री मुमुक्षु रामजी महाराज ने व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए सुदामा चरित्र का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। संत ने बताया कि वर्तमान युग में सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ है, और यदि मित्रता होती है तो वह कृष्ण-सुदामा जैसी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा के चरणों का कांटा स्वयं भगवान ने निकाला, और मित्र वही होना चाहिए जिसका मन पवित्र हो।

कथा में दर्शाया गया कि जब दरिद्र सुदामा द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण से मिलने आए, तब भगवान स्वयं उनके द्वार पर गए और जल की बजाय अपने अश्रु से उनके चरण धोए। इस सजीव दृश्य के माध्यम से भक्तों ने मित्रता और सेवा का गहन संदेश प्राप्त किया। कथा के दौरान “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पर सुदामा गरीब आ गया है, चावल की पोटली लेकर आए मोहन के द्वार” जैसे भजन ने माहौल को और भावपूर्ण बना दिया।

महोत्सव के अंतिम दिन हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज एवं रामस्नेही संत डॉ. रामस्वरूप शास्त्री भी उपस्थित रहे और उन्होंने धर्म एवं सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। संत श्री मुमुक्षु रामजी महाराज का अभिनंदन पोरवाल परिवार की ओर से किया गया। कथा के दौरान पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया, समाजसेवी केजी तोषनीवाल, सत्यनारायण डाड, राजेन्द्र पोरवाल, अशोक चेचाणी, गुलाब सोमानी, गोपाल जागेटिया, रामपाल डाड, शिवलाल पोरवाल, रामेश्वर ईनाणी, राजेश बल्दवा, मनोहर डाड, अरविंद अजमेरा, घनश्याम काकानी, महेश झंवर, निलेश कांठेड़, पवनकुमार जैन सहित कई प्रमुख नागरिकों ने व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया।

कथा आयोजन के दौरान महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन का संचालन सुशील मरोटिया ने किया और अतिथियों का स्वागत पोरवाल परिवार के कंवरलाल पोरवाल सहित अन्य सदस्यों ने किया।

इसके पूर्व, महोत्सव के छठे दिन शुक्रवार रात भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें गायक अभिषेक माहेश्वरी ने श्याम भक्ति से ओतप्रोत भजनों का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया। “मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे, राम आएंगे”, “गुरूदेव दया करके मुझको अपना लेना” और “राधिका गौरी से ब्रज की छोरी से मैया करा दो मेरा ब्याह” जैसे भजनों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव ने भक्तों को न केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया, बल्कि मित्रता, सेवा और भगवान भक्ति का जीवंत संदेश भी दिया।

Pratahkal Newsroom

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