श्री हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर परिसर में पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन हरिद्वार स्थित हरिहर भागवत धाम के परमाध्यक्ष परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने शिव-सती विवाह, गुरु महिमा एवं भगवान श्रीराम के अवतार प्रसंग का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा पांडाल भक्ति रस में सराबोर रहा।

व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास जी महाराज ने कहा कि शिव और सती का मिलन सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है। उन्होंने शिव-सती विवाह प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का प्रसंग आया, तब राजा हिमाचल इस विवाह के लिए सहज रूप से तैयार नहीं हुए थे। उस समय देवर्षि नारद ने उन्हें समझाकर बताया कि यह विवाह संपूर्ण जगत के कल्याण के लिए अत्यंत दिव्य और उपयुक्त है।

कथा के दौरान गुरु महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने कहा कि गुरु ही मनुष्य की सभी भ्रांतियों को दूर कर उसे सत्य मार्ग का ज्ञान कराता है और गुरु के बिना जीवन में आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। इसके साथ ही भगवान श्रीराम के अवतार प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नारद जी के श्राप, जय-विजय तथा जालंधर आदि प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया और कहा कि परमात्मा समय-समय पर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि “जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है तब-तब मैं विभिन्न रूपों में अवतरित होता हूं।”

महाराज श्री ने कहा कि परमात्मा संत, भक्त, महापुरुष अथवा स्वयं भगवान के रूप में प्रकट होकर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का कार्य करते हैं। कथा के दौरान “सिर पर सीता राम फिक्र फिर क्या करना, तेरे बिगड़े बनेंगे काम फिर क्या करना, क्या करना..भाई..क्या करना” भजन पर श्रद्धालु भक्ति भाव में झूम उठे और जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।

उन्होंने श्रीराम कथा को मर्यादित जीवन, सेवा और त्याग का संदेश देने वाली बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सेवा और आदर्शों की अनुपम प्रेरणा है। राम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक साधना है। विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा श्रीराम के जीवन प्रसंगों से मिलती है। कथा के दौरान सुमधुर भजन-कीर्तन एवं संकीर्तन से वातावरण और अधिक दिव्य हो गया।

आरती के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण कर तीसरे दिन के सत्र का समापन हुआ। इसी क्रम में आज सवेरे हुए विष्णु यज्ञ में चंद्रप्रकाश सिसोदिया एवं भागीरथ चौहान ने जोड़े सहित आहुतियां दीं तथा महादेव का रुद्राभिषेक किया। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर परिसर में महामंडलेश्वर हंसराम जी उदासीन के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से यज्ञाचार्य पंडित रोशन शास्त्री के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विष्णु यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। तत्पश्चात उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के मुखारविंद से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सिद्धेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक संपन्न होता है।

सायंकाल काशी की तर्ज पर गंगा आरती तथा 24 घंटे निरंतर हरिनाम संकीर्तन का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है, जिससे संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से आलोकित हो उठा है।

महत्वपूर्ण समापन: श्रीराम कथा, यज्ञ, रुद्राभिषेक, गंगा आरती और निरंतर संकीर्तन की यह श्रृंखला श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और भक्ति के गहन आध्यात्मिक मार्ग से जोड़ते हुए पूरे वातावरण को दिव्य अनुभूति से परिपूर्ण कर रही है।

Pratahkal Bureau

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