शाहपुरा: 10 वर्षों से फाइलों में दफन मंसूरी समाज के छात्रावास की आस, उच्च शिक्षा के लिए तरस रहे छात्र
शाहपुरा में मंसूरी समाज के छात्रावास हेतु भूमि आवंटन की मांग पिछले 10 वर्षों से अधर में लटकी है। जिला उपाध्यक्ष मुबारक मंसूरी ने बताया कि सैकड़ों पत्राचार के बावजूद नगर पालिका और प्रशासन मौन है। किराए और आवागमन की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण छात्रों के भविष्य को लेकर समाज ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से शीघ्र भूमि आवंटन की अपील की है ताकि उच्च शिक्षा का सपना साकार हो सके।

शाहपुरा। शिक्षा को राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है, लेकिन जब संसाधनों का अभाव प्रतिभाओं के मार्ग में बाधा बन जाए, तो यह न केवल एक समाज बल्कि पूरे तंत्र के लिए चिंता का विषय है। राजस्थान के शाहपुरा जिले में मंसूरी समाज के शैक्षणिक भविष्य पर आज भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। पिछले एक दशक से समाज द्वारा छात्रावास निर्माण हेतु भूमि आवंटन की गुहार लगाई जा रही है, किंतु प्रशासन की उदासीनता के चलते यह मांग आज भी सरकारी फाइलों और पत्राचार तक ही सीमित है।
मंसूरी समाज का कहना है कि शाहपुरा में समाज का अपना कोई छात्रावास न होने के कारण ग्रामीण अंचल से आने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई के कारण निर्धन और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र निजी मकानों का भारी किराया वहन करने में असमर्थ हैं। वहीं, दूर-दराज के गांवों से प्रतिदिन शाहपुरा तक आवागमन करना न केवल आर्थिक रूप से बोझिल है, बल्कि छात्रों के समय और ऊर्जा का भी बड़ा नुकसान करता है।
इस गंभीर मुद्दे पर मंसूरी सेवा समिति शाहपुरा के जिला उपाध्यक्ष मुबारक मंसूरी (उपरेड़ा) ने गहरा क्षोभ प्रकट किया है। उन्होंने बताया कि समाज द्वारा पिछले 10 वर्षों से नगर पालिका शाहपुरा से भूमि आवंटन की लिखित मांग की जा रही है। इस संदर्भ में न्याय की आस लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष, भीलवाड़ा जिला कलेक्टर, राजस्थान सरकार के शासन मंत्री, अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, स्वायत्त शासन मंत्री, यहां तक कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल महोदय तक को सैकड़ों पत्र भेजे जा चुके हैं।
कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो मंसूरी समाज की संस्था 'अल्पिंजारा मंसूरी सेवा समिति शाहपुरा' वर्ष 2009 से विधिवत रूप से पंजीकृत है। राजकीय नियमों की पालना करते हुए संस्था ने नगर पालिका शाहपुरा में छात्रावास आवंटन हेतु निर्धारित प्रपत्र में पत्रावली भी जमा कर रखी है। इसके बावजूद, वर्षों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी भूमि आवंटन की प्रक्रिया धरातल पर नहीं उतर सकी है।
मुबारक मंसूरी ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर भूमि आवंटित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि छात्रावास का निर्माण होता है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों प्रतिभावान छात्रों को शाहपुरा में रहकर शिक्षा ग्रहण करने का समान अवसर मिलेगा। यह न केवल छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि उन्हें देश और प्रदेश की उन्नति में अपना योगदान देने के योग्य भी बनाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और कब इन छात्रों के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त होता है।

Pratahkal Bureau
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