शाहपुरा की रियासतकालीन विरासत संरक्षण के अभाव में बदहाली का सामना कर रही है। कभी शहर की सुरक्षा और शान के प्रतीक रहे परकोटे के ऐतिहासिक गेट अब अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कुंड गेट और राजमहल के गेट की जर्जर स्थिति, दीवारों पर उगी वनस्पति और रखरखाव की कमी ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय रहते इनकी सुध नहीं ली गई तो शाहपुरा के गौरवशाली अतीत से जुड़े ये साक्ष्य अपना मूल स्वरूप खो सकते हैं।

शाहपुरा की ऐतिहासिक बसावट रियासतकाल से जुड़ी हुई है। उस दौर में शहर की सुरक्षा के लिए चारों ओर परकोटा बनवाया गया था। आक्रमणकारियों और अनधिकृत प्रवेश को रोकने के उद्देश्य से परकोटे में पांच प्रमुख गेट बनाए गए थे। समय के साथ उचित देखभाल नहीं होने के कारण अधिकांश गेट अपना अस्तित्व खो चुके हैं। वर्तमान में कुंड गेट, जिसे स्थानीय भाषा में नेहरों का गेट भी कहा जाता है, और कालिंजरी गेट इस ऐतिहासिक व्यवस्था की पहचान के रूप में बचे हैं।

कुंड गेट की छत पर उगी वनस्पति से संरचना को खतरा

शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल कुंड गेट की छत और ऊपरी हिस्से पर पेड़-पौधे, जंगली वनस्पति और खरपतवार उग आए हैं। इनकी जड़ें दीवारों और छत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। नियमित सफाई और मरम्मत के अभाव में गेट की संरचना कमजोर होने की आशंका है। इसके बावजूद परिसर की मौजूदा स्थिति ऐतिहासिक निर्माणों के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

कुंड गेट पर शाहपुरा स्टेट का राजचिह्न भी अंकित है। इसमें दो शेरों के बीच राजचिह्न बना हुआ है, जो रियासतकालीन इतिहास की महत्वपूर्ण निशानी है। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस निर्माण पर उगी वनस्पति और रखरखाव की कमी संरक्षण के प्रति उदासीनता को उजागर करती है।

ऊपर स्काउट-गाइड कार्यालय, नीचे संचालित होती हैं दुकानें

कुंड गेट के ऊपरी हिस्से में स्काउट-गाइड संघ का कार्यालय है, जबकि नीचे की ओर दुकानें संचालित होती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन दुकानों का किराया संघ की ओर से वसूला जाता है। हालांकि, परिसर के रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। संघ में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भी प्रभारी हैं। ऐसे में ऐतिहासिक गेट के नियमित निरीक्षण और संरक्षण की व्यवस्था के साथ जिम्मेदारी स्पष्ट करने की जरूरत सामने आई है।

नगर पालिका के एक निर्वाचित पार्षद ने भी इस समस्या को लेकर अधिशासी अधिकारी को लिखित में अवगत कराया है। इसके बावजूद ऐतिहासिक गेटों की जर्जर स्थिति और वहां उगी वनस्पति का मुद्दा संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

जीव दया सेवा समिति ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

ऐतिहासिक धरोहरों की स्थिति को लेकर जीव दया सेवा समिति ने भी आवाज उठाई है। समिति के संयोजक अतू खां कायमखानी ने कुंड गेट और राजमहल के गेट की बदहाली पर चिंता जताते हुए नगर पालिका से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि ये गेट केवल पुराने निर्माण नहीं हैं, बल्कि शाहपुरा की ऐतिहासिक पहचान हैं। राजमहल का गेट भी जर्जर अवस्था में है। समिति ने गेटों पर उगी वनस्पति हटाने, विशेषज्ञों की देखरेख में मरम्मत कराने और इनके संरक्षण के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग उठाई है।

ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए नगर पालिका और संबंधित विभागों की ओर से संयुक्त निरीक्षण कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। इसके साथ ही निर्माणों की तकनीकी जांच, सुरक्षित तरीके से वनस्पति हटाने और समयबद्ध मरम्मत की आवश्यकता है। कुंड गेट और राजमहल के गेट की मौजूदा स्थिति ने शाहपुरा की रियासतकालीन विरासत के संरक्षण का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन ऐतिहासिक निर्माणों को सुरक्षित रखने के लिए कब और क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि एक बार मूल स्वरूप नष्ट होने के बाद उसे उसी रूप में लौटाना संभव नहीं होगा।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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