भीलवाड़ा में शीत लहर का प्रचंड प्रहार: ननिहालों की सुरक्षा के लिए कलेक्टर ने घोषित किया 3 दिवसीय अवकाश
भीलवाड़ा में भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड के चलते जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 6 से 8 जनवरी 2026 तक 3 दिवसीय अवकाश घोषित किया है। बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए लिए गए इस निर्णय और आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इन दिनों हाड़ कंपाने वाली सर्दी और जानलेवा शीतलहर की चपेट में है। आसमान से बरसती ठंड और लगातार गिरते पारे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर देखा जा रहा था। स्थिति की गंभीरता और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु ने जिले के कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में तीन दिनों के अवकाश की घोषणा कर दी है, जिससे ठिठुरते बच्चों और उनके चिंतित अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।
भीलवाड़ा जिले में कड़ाके की ठंड का आलम यह है कि सुबह की ओस और बर्फीली हवाओं ने सामान्य जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए आगामी पूर्वानुमान और शिक्षा विभाग से प्राप्त गंभीर प्रस्तावों का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर जसमीत सिंह संधु ने यह प्रशासनिक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत जिले के समस्त राजकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में कक्षा 01 से 08 तक के विद्यार्थियों के लिए 6 जनवरी से 8 जनवरी 2026 तक पूर्ण अवकाश रहेगा। प्रशासन का यह कदम बच्चों को मौसमी बीमारियों और शीतलहर के सीधे प्रकोप से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रशासनिक आदेश में स्पष्टता बरतते हुए यह भी निर्देशित किया गया है कि यद्यपि विद्यार्थियों के लिए अवकाश रहेगा, किंतु विद्यालय का समस्त शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ पूर्व की भांति नियमित रूप से संस्थान में उपस्थित रहेगा। जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कोई भी शिक्षण संस्थान इन आदेशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पिछले कुछ दिनों से समूचा भीलवाड़ा जिला भीषण सर्दी के आगोश में है। सुबह और देर रात के समय चलने वाली बर्फीली हवाओं ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके चलते लंबे समय से स्कूलों में छुट्टी की मांग की जा रही थी। प्रशासन का यह समयोचित निर्णय न केवल नौनिहालों के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि इस प्राकृतिक आपदा जैसी ठंड के बीच एक सुरक्षा कवच का कार्य करेगा। वर्तमान में प्रशासन की पैनी नजर मौसम के बदलते मिजाज पर टिकी हुई है।

Pratahkal Bureau
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