भीलवाड़ा में बाइक चोर गिरोह का सनसनीखेज पर्दाफाश: कोर्ट परिसर से उड़ी बाइक ने खोला 12 चोरियों का राज, दो शातिर गिरफ्तार
भीलवाड़ा के मांडलगढ़ में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट परिसर से बाइक चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजकुमार मेवाडा और सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर 12 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। जानिए कैसे एक छोटी सी चोरी ने खोला भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में सक्रिय शातिर चोरों का काला चिट्ठा और कैसे पुलिस ने तकनीकी जांच से इन्हें दबोचा।

भीलवाड़ा। अपराध की दुनिया में शातिर अपराधी अक्सर एक छोटी सी चूक से सलाखों के पीछे पहुँच जाते हैं, और ऐसा ही कुछ भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ में देखने को मिला। न्याय के मंदिर यानी कोर्ट परिसर के बाहर से बाइक चुराकर कानून को चुनौती देने वाले दो शातिरों को मांडलगढ़ पुलिस ने धर दबोचा है। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने न केवल गिरोह का भंडाफोड़ किया, बल्कि उनकी निशानदेही पर चोरी की गई 12 मोटरसाइकिलें बरामद कर इलाके में सक्रिय वाहन चोरों की कमर तोड़ दी है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 14 जनवरी 2026 को हुई, जब बीगोद के चमन चौराहा निवासी सिकन्दर पुत्र अब्दुल गनी लुहार अपनी बाइक लेकर मांडलगढ़ कोर्ट परिसर पहुँचे थे। जब वे अपना कार्य निपटाकर बाहर आए, तो उनकी नजरों के सामने से मोटरसाइकिल गायब थी। इस दुस्साहसिक चोरी ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया। थाना प्रभारी घनश्याम सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने तत्काल घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया।
डिजिटल फुटप्रिंट्स और मुखबिरों की सूचना के आधार पर पुलिस की जांच की सुई चित्तौडग़ढ़ जिले की ओर घूमी। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने पारसोली के कुम्हार मोहल्ला निवासी 40 वर्षीय राजकुमार मेवाडा पुत्र हीरालाल मेवाडा और गणेशचौक पारसोली के रहने वाले 32 वर्षीय सद्दाम हुसैन पुत्र मुनीर अहमद शेख को हिरासत में लिया। जब पुलिस ने इनसे सख्ती से पूछताछ की, तो परत-दर-परत सच सामने आने लगा। दोनों आरोपितों ने मांडलगढ़ कोर्ट परिसर सहित चित्तौडग़ढ़ और भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 12 मोटरसाइकिलें चोरी करने की बात स्वीकार की।
पुलिस की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त पर अलग-अलग स्थानों से 11 अन्य बाइकें भी बरामद कर ली गईं। ये बाइकें गोवटा माताजी क्षेत्र, कपासन, पारसोली और बिगोद सर्कल जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों से पार की गई थीं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि राजकुमार और सद्दाम चोरी की गई इन बाइकों की नंबर प्लेट हटाकर उन्हें ग्रामीण इलाकों में औने-पौने दामों पर बेचने की फिराक में थे। पुलिस ने इंजन और चेसिस नंबरों के जरिए सभी वाहनों के असली मालिकों की पुष्टि कर ली है। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन दोनों के तार किसी अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह से जुड़े हैं। इस बड़ी सफलता ने आमजन के बीच पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।

Pratahkal Bureau
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