चारभुजा मंदिर के 26वें पाटोत्सव का शुभारंभ, भागवत कथा से गूंजा भक्तिमय वातावरण
श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित 26वें पाटोत्सव महोत्सव के तहत आचार्य श्री शक्तिदेव जी महाराज के सानिध्य में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।

संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को कथा रसपान कराते आचार्य श्री शक्तिदेव जी महाराज।
संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में आयोजित 26वें पाटोत्सव महोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ हुआ। श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति एवं महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के अंतर्गत श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
कथा प्रारंभ से पूर्व समिति के मंत्री अरविंद जैन ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से 12 जून से 18 जून तक आचार्य श्री शक्तिदेव जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा तथा 19 जून को भगवान श्री चारभुजा नाथ के समक्ष छप्पन भोग महाप्रसाद आयोजन का निर्णय लिया गया था।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष जगदीश चंद्र देवपुरा, उपाध्यक्ष जगदीश समदानी, मंत्री अरविंद जैन, कोषाध्यक्ष रामराय गट्टानी, सहमंत्री दिनेश मालीवाल एवं वरिष्ठ सदस्यों ने राष्ट्रीय विचारक एवं ओजस्वी वक्ता आचार्य श्री शक्तिदेव महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया। साथ ही भजन गायक राजू राव, तबला वादक दिनेश चंद्र, निशांत शर्मा, राहुल शर्मा एवं रामकृत मिश्रा का भी सम्मान किया गया। महेश मार्ग महिला मंडल ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि मंदिर महिला मंडल की सदस्यों ने भगवान श्री चारभुजा नाथ के भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” के मंगलाचरण के साथ 136वीं श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस में आचार्य श्री शक्तिदेव महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान की कथा का श्रवण मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सदाचार, भक्ति और वैराग्य की दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है।
आचार्य श्री ने कहा कि जिनके हृदय में सच्ची भक्ति का वास होता है, वहां काम, क्रोध और अहंकार टिक नहीं सकते। उन्होंने ज्ञान, भक्ति और वैराग्य को मानव कल्याण का आधार बताते हुए कहा कि इन तीनों के समन्वय से ही जीवन का वास्तविक उत्थान संभव है।
कथा के दौरान आत्मदेव ब्राह्मण, धुंधकारी और गोकर्ण के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। उन्होंने गोकर्ण द्वारा सुनाई गई भागवत कथा के प्रभाव से धुंधकारी की प्रेतयोनि से मुक्ति के प्रसंग को भागवत महिमा का अद्भुत उदाहरण बताया।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में “मैं और मेरा” का भाव ही बंधन का मूल कारण है। जब व्यक्ति ममता, आसक्ति और अहंकार का त्याग कर भगवान को अपने हृदय में स्थापित कर लेता है, तब वह भवसागर से पार हो सकता है। उन्होंने साधु-संतों की सेवा, हरिकथा श्रवण, निंदा त्याग और वैराग्यपूर्ण जीवन को मोक्ष का मार्ग बताया।
आचार्य श्री ने शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध को पांच प्रमुख बंधन बताते हुए कहा कि इन्हीं इंद्रियों का सदुपयोग भगवान की भक्ति में करने से जीवन सफल बनता है। उन्होंने श्रद्धा एवं नियमपूर्वक सात दिवसीय भागवत कथा श्रवण को आध्यात्मिक उत्थान का प्रभावी माध्यम बताया।
अपने ओजस्वी प्रवचनों और भजनों के माध्यम से आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश भी दिए। “तेल चमेली, चंदन साबुन, चाहे लगा लो सेंट, जगत में कोई नहीं परमानेंट...” भजन ने जीवन की क्षणभंगुरता का भावपूर्ण संदेश दिया, जबकि “म्हारा चारभुजा रा नाथ, ओ म्हारा कोटड़ी का श्याम...” भजन की प्रस्तुति पर पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूम उठे और अनेक भक्त भाव-विभोर होकर नृत्य करते नजर आए।
कथा के समापन पर भगवान श्री चारभुजा नाथ की आरती एवं भजनों के साथ वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आरती का लाभ ओमप्रकाश गट्टानी एवं रामराय गट्टानी परिवार ने लिया, जबकि प्रसाद वितरण का लाभ प्रहलाद नुवाल एवं उनके परिवार द्वारा किया गया।
पाटोत्सव एवं कथा महोत्सव के सफल आयोजन में श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति, महिला मंडल एवं अनेक समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा। समिति ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में आयोजित होने वाली कथा एवं धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन का भी महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ।

Pratahkal Bureau
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