सांगानेर। धर्म और अध्यात्म की नगरी सांगानेर में सनातन संस्कृति की ध्वजा को बुलंद करते हुए रामायण मंडल द्वारा श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। पौष शुक्ल द्वादशी, बुधवार दिनांक 31 दिसंबर 2025 को आयोजित इस भव्य समारोह ने संपूर्ण क्षेत्र को राममय कर दिया। आयोजन की शुरुआत श्री सुरेंद्र किंजड़ा के निवास स्थान पर अलसुबह 5:00 बजे अखंड रामचरितमानस पाठ के साथ हुई, जो निरंतर चलते हुए रात्रि 10:00 बजे पूर्ण हुई। इस दौरान सामूहिक रूप से भगवान श्री राम की स्तुति और सुंदरकांड के स्वरों से वातावरण गुंजायमान रहा, जिसमें बड़ी संख्या में राम भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस ऐतिहासिक उत्सव को यादगार बनाया।

रामायण मंडल सांगानेर ने इस वर्ष केवल उत्सव ही नहीं मनाया, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में एक अनुकरणीय मिसाल भी पेश की है। मंडल के प्रमुख सदस्यों श्री जगदीश चंद्र डाड, श्री ओम प्रकाश कोठारी और श्री रामेश्वर जाट ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में मंडल द्वारा कुल 32 अखंड रामचरितमानस पाठ सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। यह उपलब्धि न केवल मंडल की अटूट श्रद्धा को दर्शाती है, बल्कि समाज में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।

सांगानेर रामायण मंडल की कार्यप्रणाली भी अपने आप में अनूठी और प्रेरक है। सनातन मूल्यों को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से प्रत्येक रविवार को किसी न किसी भक्त के निवास पर रामचरितमानस का पाठ आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम का स्वरूप अत्यंत आकर्षक होता है, जिसमें सर्वप्रथम प्रभु की स्तुति की जाती है, तत्पश्चात पुरुषों और महिलाओं के बीच रामचरितमानस की चौपाइयों पर आधारित अंताक्षरी की प्रतियोगिता होती है। इस रचनात्मक पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को भी धर्मग्रंथों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम का समापन संगीतमय हनुमान चालीसा, हृदयस्पर्शी भजन-कीर्तन और भव्य आरती के साथ पूर्ण आनंद के साथ होता है।

भक्ति के इस अविरल प्रवाह को जारी रखते हुए रामायण मंडल ने नए वर्ष की रूपरेखा भी तैयार कर ली है। इसी क्रम में वर्ष 2026 का प्रथम रामचरितमानस पाठ श्री कृष्ण गोपाल जी एवं श्री जगदीश चंद्र जी डाड के निवास स्थान पर प्रस्तावित किया गया है। मंडल के पदाधिकारियों ने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाले सभी राम भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सांगानेर का यह भक्ति आंदोलन आने वाले समय में सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु एक प्रेरणापुंज सिद्ध होगा।

Pratahkal Bureau

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