भीलवाड़ा, 16 मार्च। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा पथिकनगर केन्द्र के तत्वावधान में रविवार को आयोजित विशाल साधु संत महासम्मेलन में सनातन संस्कृति की अविनाशी महत्ता और आध्यात्मिकता के माध्यम से इसकी रक्षा पर गहन चर्चा हुई। महासम्मेलन में उपस्थित सभी वक्ताओं ने सनातन संस्कृति को केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन दर्शन और आध्यात्मिकता की जड़ बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

विजयसिंह पथिकनगर स्थित अग्रवाल भवन में तीन घंटे से अधिक समय तक चले इस महासम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंदजी महाराज, सहारनपुर से आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोरजी महाराज, हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसारामजी उदासीन, ब्रह्माकुमारी प्रयागराज की धार्मिक प्रभाग अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी और ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू के धार्मिक प्रभाग मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिले के विभिन्न धर्मस्थलों के सैकड़ों संत, महात्मा, पुजारी, पंडित और कथावाचक शामिल हुए, जिन्हें ब्रह्माकुमारीज भीलवाड़ा केन्द्र ने स्वागत किया।

महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंदजी महाराज ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए जीवन समर्पित किया। वेद इस संस्कृति के मूल ग्रंथ हैं और संस्कार एवं संस्कृति को जानने पर ही आध्यात्मिकता सनातन की रक्षा कर सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में भगवाधारी संत हैं, सनातन संस्कृति को कोई मिटा नहीं सकता। जीवन में सनातन अपनाने से आत्मा का दिव्य प्रकाश प्रकट होता है।

महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसाराम उदासीन ने कहा कि सनातन संस्कृति सबके सुख और मंगल की कामना करती है। सेवा और सिमरन से ही सुख की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि सनातन सभ्यता अजर अमर है और इसे मिटाने का प्रयास करने वाले असफल रहे हैं। इसके संरक्षण के लिए सनातनियों को एकजुट रहना आवश्यक है।

आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोर महाराज ने मान-अपमान और यश-अपयश में सम भाव बनाए रखने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रेम के उदय से क्रोध स्वतः समाप्त होता है और जीवन में ज्ञान योग श्रेष्ठ मार्ग है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए पूर्ण विश्वास आवश्यक है।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी ने कहा कि सनातन संस्कृति अविनाशी है और इसके स्तंभ महंत, पंडित और पुजारी हैं। आत्मा प्रेम, आनंद और कल्याण स्वरूप है। उन्होंने युद्ध और संकट के इस युग में मानवता की रक्षा के लिए आध्यात्मिक जागरूकता पर जोर दिया।

ब्रहमाकुमार रामनाथ भाई ने भारत की संस्कृति को सनातन दर्शन आधारित बताते हुए कहा कि बच्चों को यह समझाना आवश्यक है कि सनातन संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और इसे अपनाने से जीवन का कायाकल्प संभव है। उन्होंने आत्मज्ञान के महत्व और आध्यात्मिक आचरण से ही संस्कृति की सच्ची समझ प्राप्त होने की बात कही।

समारोह में मध्यप्रदेश जोनल समन्वयक नारायण भाई ने सम्मेलन का परिचय दिया। प्रयागराज से आई बीके श्रद्धा दीदी ने राजयोग की अनुभूति कराते हुए सुखी और तनावमुक्त जीवन का मार्ग बताया। भीलवाड़ा केन्द्र की प्रभारी इन्द्रा बहन ने 15 केन्द्रों के संचालन और बहनों द्वारा दी जा रही सेवाओं की जानकारी दी। समारोह में 30 राजयोगी युगलों का सम्मान किया गया। भोलाराम भाई व इन्द्र आगाल बहन ने अपने अनुभव साझा किए। बीके तरूणा दीदी ने संचालन किया और बीके अमोलक भाई ने आभार व्यक्त किया। समारोह की शुरुआत में ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य रामदयाल महाराज ने भी शुभकामनाएं प्रेषित की।

इस महासम्मेलन ने स्पष्ट कर दिया कि सनातन संस्कृति अजर अमर है और आध्यात्मिक ज्ञान एवं संत महात्माओं के मार्गदर्शन से ही इसकी रक्षा, पुनर्स्थापना और प्रसार संभव है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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