राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती आदेश निरस्त किए जाने के विरोध में संविदा नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन चौथे दिन बेहद उग्र और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया। नौकरी बहाली की मांग को लेकर धरने पर बैठे कार्मिकों ने सामूहिक रूप से 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया और कॉलेज प्रशासन तथा ठेकेदार की 'सद्बुद्धि' के लिए प्रार्थना की।

इससे एक दिन पहले समाधान नहीं निकलने से आक्रोशित कर्मियों ने अपने खून से प्राचार्य के नाम पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सेवा बहाली का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा।

पूरा विवाद 144 नए पदों की स्वीकृति के बाद शुरू हुआ। इस दौरान 48 पुराने संविदा कर्मियों को हटा दिया गया था। इसके बाद प्रशासन और स्थानीय विधायक के हस्तक्षेप से 35 पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार की गई और प्लेसमेंट एजेंसी को 30 पदों पर नियुक्ति के निर्देश दिए गए थे।

आरोप है कि ठेकेदार ने मनमानी करते हुए 30 में से केवल 17 पुराने कर्मियों को रखा और 13 नए चेहरों की भर्ती कर ली। गड़बड़ी सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने जॉइनिंग से ठीक पहले 14 अगस्त को भर्ती आदेश निरस्त कर दिए।

नौकरी छिन जाने के बाद ये कर्मी पिछले दो महीनों से बेरोजगार हैं और भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवा बहाली का लिखित आदेश जारी होने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। शनिवार को कर्मियों की ओर से सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

इस तरह भर्ती आदेश निरस्त किए जाने के विरोध में संविदा नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा और नौकरी बहाली की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने अपना विरोध धार्मिक आयोजन के जरिए भी दर्ज कराया।

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