रामस्नेही चिकित्सालय में आचार्य श्री 1008 श्री रामदयाल जी महाराज ने किया ध्वजारोहण
रामस्नेही चिकित्सालय में स्वतंत्रता दिवस पर आचार्य श्री 1008 श्री रामदयाल जी महाराज ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रधर्म, मानवता और संस्कारों का संदेश देते हुए उन्होंने स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के अंतर पर विचार रखे।

तस्वीर में रामस्नेही चिकित्सालय के प्रांगण में पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामदयाल जी महाराज और अन्य संतगण ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान खड़े नजर आ रहे हैं।
रामस्नेही चिकित्सालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय श्री रामस्नेही सम्प्रदाय के वर्तमान पीठाधीश्वर प्रातः स्मरणीय जगद्गुरू स्वामी जी श्री 1008 श्री रामदयाल जी महाराज ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने 80वें स्वाधीनता दिवस राष्ट्रीय महापर्व की बधाई दी।
रामस्नेही चिकित्सालय प्रबंध समिति के सदस्य सतीप भदादा ने बताया कि ध्वजारोहण कार्यक्रम में रामस्नेही संत, रामस्नेही चिकित्सालय प्रबंध समिति के सदस्य, चिकित्सक स्टॉफ, नर्सिंग स्टॉफ, रामस्नेही कॉलेज ऑफ नर्सिंग के फेकल्टी मेंबर, अन्य कर्मचारी एवं रामस्नेही सत्संगी जन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान समय में स्वतंत्रता बनाम स्वच्छंदता की लड़ाई हो रही है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जिसके अंदर जवाबदारी, जिम्मेदारी, वफादारी और ईमानदारी, ये चारों तत्व विद्यमान हैं, वह पक्का राष्ट्र धर्म का जीता-जागता उदाहरण है।
आचार्य श्री ने कहा कि जिसको दुःख दिया, वह आज दुःख झेल लेगा और सुखी हो जाएगा, लेकिन दुःख देने वाला कभी भी सुखी नहीं होगा। उन्होंने इसे वैदिक संविधान बताते हुए कहा कि अगर किसी का भला न कर सको तो कोई बात नहीं, लेकिन किसी का बुरा हमसे न हो, इस बात का संकल्प जरूर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंतर्मन में यह भाव उठता है कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, मास्टर का बेटा मास्टर बनता है और व्यापारी अपने बेटे को व्यापारी बना देता है, तो मनुष्य अपने बेटे को मनुष्य क्यों नहीं बनाता है, यह उन्हें आश्चर्य लगता है। आचार्य श्री ने कहा कि पहले मनुष्य बनो। आज भक्ति के पासपोर्ट की जरूरत नहीं है, बल्कि मानवता के परमिट की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मां-बाप को मनुष्य नहीं, पवित्र एवं संस्कारी संतान चाहिए और संतान को तपस्वी माता-पिता की जरूरत है।
आचार्य श्री ने कहा कि आज पहली बार राष्ट्र पर्व वंदे मातरम के रूप में मन रहा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कोई और राष्ट्र कल दखल करे, लेकिन वंदे मातरम, वंदे मातरम ही रहेगा, क्योंकि भारतमाता को सारा विश्व प्रणाम करता है।
कार्यक्रम में रमा कथक संस्थान द्वारा देशभक्ति गीतों पर आकर्षक एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। वहीं, रामस्नेही कॉलेज ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने अपने ओजपूर्ण देशभक्ति गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर समूचे वातावरण को राष्ट्रभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।

