भीलवाड़ा, 31 जुलाई। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म अपनी भक्ति और गहराई के कारण विश्व में अजर-अमर है तथा विश्व की कोई भी आणविक शक्ति सनातन धर्म और भारत राष्ट्र को आंच नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म फौलादी था, फौलादी है और फौलादी ही रहेगा। आचार्यश्री ने ये विचार शुक्रवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में बदलते रहना चाहिए, लेकिन कभी भी बदला लेने की भावना नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पति-पत्नी बदले की भावना के साथ जीते हैं तो इतिहास बदल जाता है। इसी प्रकार भाई-भाई, पिता-पुत्र और अड़ोसी-पड़ोसी जब बदला लेते हैं तो रक्तरंजित इतिहास बन जाता है। इसके विपरीत जब व्यक्ति स्वयं को बदलने का प्रयास करता है तो जहरीला वातावरण भी अमृतमय बन जाता है। उन्होंने कहा कि संत और गुरु दृष्टि बदलते हैं, सृष्टि बदलते हैं और जीवन बदल देते हैं। वे विचार और संसार बदल देते हैं, लेकिन बदला नहीं लेते, यही उनका सामर्थ्य है।



उन्होंने कहा कि शब्दों के अर्थ समझना कठिन नहीं है, लेकिन विचारों की गहराई तक पहुंचना अत्यंत जटिल है। इंसान संस्कृति का अनुकरण करने में वर्षों लगा देता है, जबकि विकृति और विकारों का शिकार रास्ते चलते ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज ज्ञान की अनेक पाठशालाएं चल रही हैं और ज्ञान की बाढ़ आई हुई है, फिर भी मानव अज्ञान के गर्त में गिरता दिखाई दे रहा है। जवाबदारी, जिम्मेदारी, वफादारी और ईमानदारी जैसे मूल्यों से समझदार व्यक्ति भी किनारा करता जा रहा है।

आचार्यश्री ने कहा कि नाम साधना का लाभ लेकर भगवंत नाम का जाप करने से सारा ताप, परिताप और संताप समाप्त हो जाता है, इसलिए उसके आश्रय में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संसार सार और असार का सही ज्ञान नहीं कर पाता, जबकि भगवत नाम ही वास्तविक सार है।



उन्होंने कहा कि भगवान को भूल जाने से बड़ा कोई दुःख नहीं है और भगवान को स्मरण रखने से बढ़कर संसार में कोई सुख नहीं है। उन्होंने कहा कि मनुष्य भगवान की माया को याद कर जगत में सुखी होना चाहता है, लेकिन उसके सृजनहार परमात्मा को याद करने का समय नहीं निकालता। आचार्यश्री ने कहा कि जब तक भगवान को याद नहीं करते, तब तक मनवांछित जीवन जीते रहो, लेकिन जिस दिन उन्हें गहराई से याद कर लिया, उस दिन उनके अलावा किसी से मोहब्बत नहीं रहेगी और संसार को भुलाने का प्रयास भी नहीं करना पड़ेगा, व्यक्ति स्वयं ही संसार को भूल जाएगा।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। कोटा से आए संत प्रीतमरामजी ने भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक सत्संग आयोजित किया जा रहा है, जबकि सुबह 8.30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय आयोजित संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

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कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

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अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

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अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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