रामेश्वरम। राम स्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता और भागवत मर्मज्ञ युवा संत दिग्विजयराम ने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का बखान करते हुए कहा कि विश्व के समस्त वांग्मय में केवल भागवत ही ऐसा ग्रंथ है, जो मनुष्य को मृत्यु का भय मिटाकर उसे उत्सव में बदलना सिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी पावन ग्रंथ के श्रवण से राजा परीक्षित ने मात्र सात दिनों में मोक्ष की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त किया था। यह उद्गार उन्होंने बुधवार को रामेश्वरम में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर व्यासपीठ से अमृत वर्षा करते हुए व्यक्त किए।

कथा के प्रारंभ में संत दिग्विजयराम ने मंगलाचरण के साथ नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा बताई, जहां सूत जी ने 88 हजार ऋषियों की जिज्ञासाओं का शमन करते हुए भागवत का उपदेश दिया था। उन्होंने भक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान की अहेतुकी भक्ति ही जीवन के कल्याण का एकमात्र मार्ग है। जब व्यासपीठ से 'जगन्नाथ जगन्नाथ जगन्नाथ नीलानचल वाले... चकानयन तू न संभाले तो हमें कौन संभाले' भजन की स्वर लहरियां गूंजीं, तो उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। संत ने शबरी की प्रतीक्षा और मीरा की प्रेमाभक्ति का उदाहरण देते हुए समाज को ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास जगाने का आह्वान किया।

ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 17 पुराणों की रचना के बाद भी जब महर्षि वेदव्यास को आत्मिक शांति नहीं मिली, तब नारद मुनि के मार्गदर्शन में 18वें महापुराण के रूप में श्रीमद् भागवत का सृजन हुआ। उन्होंने नारद जी के पूर्व जन्म का वृत्तांत सुनाते हुए सत्संग की महिमा बताई कि कैसे एक दासी पुत्र संतों के सान्निध्य से देवर्षि के पद तक पहुंचा। कथा के दौरान उत्तरा के गर्भ से राजा परीक्षित के जन्म, भगवान श्री कृष्ण की रक्षा और कुंती स्तुति के प्रसंगों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि जहां साधारण मनुष्य सुख मांगता है, वहीं माता कुंती ने विपत्ति मांगी ताकि हर पल गोविंद का स्मरण बना रहे।

सामाजिक चेतना जागृत करते हुए संत दिग्विजयराम ने कलयुग के प्रभाव और उससे बचाव के मार्ग भी बताए। उन्होंने कहा कि जुआ, मदिरा, वासना, हिंसा और अधर्म के स्वर्ण में कलयुग का वास है, जिनसे दूर रहकर ही शांति संभव है। उन्होंने सनातन धर्म की एकता पर बल देते हुए आह्वान किया कि यदि सभी 97 करोड़ हिंदू जाति-पाति के भेदभाव को त्यागकर एकजुट हो जाएं और शास्त्र के साथ शस्त्र की महत्ता को समझें, तभी भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण रह पाएगी। कथा के अंत में आयोजक मंडल परिवार और क्षेत्र के गणमान्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की सामूहिक आरती उतारकर विश्व शांति की कामना की।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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