रामभक्ति प्रबल होने पर जागृत होती है राष्ट्रभक्ति: आचार्य रामदयालजी महाराज, 13 सितंबर से 108 वाणी पाठ
भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आचार्य रामदयालजी महाराज ने रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति को एक बताया। स्वाधीनता दिवस पर राष्ट्रधर्म, शहीद परिवारों की सेवा और 13 सितंबर से होने वाले 108 वाणी पाठ पर भी संदेश दिया।

तस्वीर में माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित सत्संग के दौरान मंच पर विराजमान अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज और अन्य संत नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 16 अगस्त। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति अलग-अलग नहीं हैं। जब रामभक्ति प्रबल होती है तो राष्ट्रभक्ति जागृत होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी अपने राष्ट्र के ऋणी हैं। हिन्दुस्तान की धरती पर जन्म लेने वाला हिन्दू है और भारत की माटी पर जन्म लेने वाला भारतीय है। सबसे पहले राष्ट्र धर्म का पालन करते हुए कांटों में भी फूल खिलाकर इस धरती को स्वर्ग बनाना होगा।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने ये विचार ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत राष्ट्रीय पर्व स्वाधीनता दिवस पर माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शहीदों की शहादत को पूरा राष्ट्र नमन करता है। उन वीर माताओं को भी नमन है, जिनकी आंखों में संतान के शहीद होने पर इसलिए आंसू आते हैं कि अब उनके पास राष्ट्रसेवा में भेजने के लिए कोई संतान नहीं है।
उन्होंने कहा कि विश्व में मात्र भारत ही ऐसा राष्ट्र है जिसे माता के नाम से सम्बोधित किया जाता है। मनिषियों, तपस्वियों, संत-महात्माओं और राष्ट्रप्रेमियों की धरती भारत जैसा महान राष्ट्र विश्व में न कोई था, न है और न कोई होगा। हमें अपने देश पर गर्व करते हुए कर्तव्यपरायण बनना होगा। शहीदों के परिवारों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है और उन्हें किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होनी चाहिए। संसार में राष्ट्रभक्ति से बड़ी कोई भक्ति नहीं है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव की सराहना करते हुए कहा कि उनका चिंतन बहुआयामी एवं अद्भुत शैली का है। उन्होंने अफसोस जताया कि प्रधानमंत्री किसी को गले लगाते हैं तो कुछ लोग इसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं, जैसे गले लगाना भी पाप हो गया हो। उन्होंने कहा कि सबको गले लगाकर स्वतंत्रता दिवस मनाएं, लेकिन यह कैसी आजादी है, जहां गले लगाने पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया जाता है।
राष्ट्र पर्व के पावन प्रसंग पर आचार्यश्री ने केन्द्र सरकार एवं राजस्थान सरकार से अपेक्षा जताई कि राजस्थान की उस वीर धरती पर, जहां महाराणा प्रताप एवं मुगलों की सुविधा छोड़कर वापस लौटे भाई शक्तिसिंह का मिलाप श्रीनाथजी की कृपा से हुआ था, उनका स्टेच्यू बनाकर देश में आदर्श स्थापित होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि किस तरह महाकवि तुलसीदास द्वारा दिल्ली में शक्तिसिंह को रचना सुनाने के बाद उनमें भातृत्व प्रेम एवं राष्ट्र प्रेम जागृत होता है और वह महाराणा प्रताप से गले मिलकर रो पड़ते हैं।
आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। स्वाधीनता दिवस के अवसर पर संत प्रीतमरामजी सहित कई श्रद्धालुओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों, भजनों और काव्य रचनाओं की प्रस्तुति दी।
आचार्य रामदयाल महाराज ने रविवार को सत्संग में कहा कि प्रभु चित में विराज हो जाएं तो गुण-अवगुण का भेद मिट जाता है। रामभक्ति सहज में परमात्मा की प्राप्ति करा सकती है। कभी किसी को भक्ति से भटकाना नहीं चाहिए, जो भटकाते हैं वे स्वयं भटक जाते हैं। अपने सिद्धांतों पर हमेशा कायम रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिद्धांतों की हत्या इंसान की हत्या से करोड़ गुना भयंकर पाप के समान है। स्वामी रामचरण महाराज ने जो सिद्धांत हमें दिए, उन पर चलने वाला ही सच्चा रामस्नेही है, चाहे वह भक्त हो या संत। राम-गुरु के साथ छल-कपट नहीं करना चाहिए। जो गुरु का साथ नहीं छोड़ते, उन्हें संसार में कोई धोखा नहीं दे सकता।
आचार्यश्री ने जीवन में कभी सुसाइड नहीं करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि ऐसा विचार कभी मन में नहीं लाना चाहिए। आत्मा परम तत्व होने से उसकी हत्या कभी नहीं हो सकती। मनुष्य भव पाकर जो परमात्मा की स्तुति और भजन नहीं करता, वह आत्मा का हत्यारा है।
सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान 13 से 19 सितम्बर तक भीलवाड़ा में पहली बार 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे और निरंतर वाणी पाठ करेंगे। ये सभी पाठक पुरुष श्रद्धालु होंगे, जो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से आएंगे।
इस अवधि में सुबह 8 से 11 बजे तक वाणीजी के प्रवचन होंगे। दोपहर 2 से 5 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होगा। इसी दौरान 108 भागवत का मूल पाठ भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से यह आयोजन किया जा रहा है।

