कोर्ट ने थानाधिकारी राजपाल सिंह की 'दादागिरी' पर सख्त टिप्पणी करते हुए गृह सचिव और डीजीपी से 8 मई तक रिपोर्ट तलब की है।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रतापनगर थानाधिकारी राजपाल सिंह के आचरण और व्यवहार पर कड़ा रुख अपनाते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की है। माननीय न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्पष्ट किया कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर आसीन व्यक्ति को खाकी वर्दी की गरिमा और मर्यादा का सदैव ध्यान रखना चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस सुनवाई के दौरान कोर्ट के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अधिकारी को इतनी ही 'दादागिरी' दिखानी है, तो उन्हें तत्काल अपनी नौकरी छोड़ देनी चाहिए और गांव जाकर अपनी मर्जी से घूमना चाहिए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने थानाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश पारित किए हैं।

अदालत ने इस प्रकरण की प्रति गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को प्रेषित करने का निर्देश दिया है, ताकि दोषी पुलिस अधिकारी पर उचित और कठोर कदम उठाए जा सकें। माननीय न्यायालय ने इस बात पर विशेष बल दिया कि संबंधित क्षेत्र के आम नागरिक बिना किसी भय, उत्पीड़न या अपमान के डर के शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें पुलिस महानिदेशक को थानाधिकारी के विरुद्ध की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष अनिवार्य रूप से पेश करनी होगी।

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