बजरी संकट: उपभोक्ता समिति की सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की मांग
राजस्थान में बजरी की बढ़ती कीमतों और माफिया राज के खिलाफ उपभोक्ता अधिकार समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जनहित के निर्णयों की समीक्षा की अपील की है।

तस्वीर में उपभोक्ता अधिकार समिति का आधिकारिक लोगो और लोगों को जनहित में आवाज उठाने के लिए प्रेरित करने वाला एक संदेश दिखाई दे रहा है।
राजस्थान में बजरी संकट और विरोधाभासी सरकारी नीतियों को लेकर उपभोक्ता अधिकार समिति राजस्थान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजकर सुप्रीम कोर्ट से बजरी सहित जनहित से जुड़े निर्णयों पर पुनर्विचार कराने की मांग की है। समिति का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण आम नागरिक वर्षों से आवास निर्माण जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जबकि इसका सबसे अधिक लाभ बजरी माफिया उठा रहे हैं।
समिति के केन्द्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. अशोक सोडाणी ने कहा, "बिना बजरी के कोई निर्माण कार्य कैसे हो पाएगा? घर, स्कूल और सड़क सहित हर निर्माण में बजरी की आवश्यकता होती है। लेकिन नियम ऐसे बना दिए गए हैं कि 1000 रुपये की बजरी आम आदमी को 10 हजार रुपये में खरीदनी पड़ रही है, जबकि इसका फायदा बजरी माफिया उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कारण आम आदमी की छत पर विगत कई वर्षों से संकट बना हुआ है।"
डॉ. अशोक सोडाणी ने बताया कि समिति द्वारा राष्ट्रपति महोदया, चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए ज्ञापन में सरकार की विभिन्न नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि एक तरफ औद्योगीकरण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तो दूसरी ओर व्यापारी इंस्पेक्टर राज से परेशान हैं। एक तरफ नशे पर सख्ती की बात की जाती है तो दूसरी तरफ दारू और अफीम के लाइसेंस जारी किए जाते हैं। इसी प्रकार एक ओर भारतीय संस्कृति को बचाने की बात होती है तो दूसरी ओर बच्चों के हाथ में एंड्रॉइड फोन देकर अश्लीलता परोसी जा रही है।
उन्होंने कहा कि एसी कमरों में बैठकर लिए गए फैसलों की अब समीक्षा होना आवश्यक है। उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट का गठन भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत हुआ है, लेकिन लोकतंत्र के वास्तविक मालिक आम आदमी को ही नजरअंदाज किया जा रहा है।
उपभोक्ता अधिकार समिति के केन्द्रीय महासचिव एडवोकेट प्रहलाद राय व्यास, केन्द्रीय अध्यक्ष सुनील राठी, केन्द्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. अशोक सोडाणी, केन्द्रीय महिला अध्यक्ष मधु जाजू, केन्द्रीय उपाध्यक्ष अशोक सोमानी, जिला युवा अध्यक्ष अमित सोमानी, जिला महिला अध्यक्ष अर्चना दूबे तथा अन्य सदस्यों ने राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया है कि वे सुप्रीम कोर्ट से बजरी एवं जनहित से जुड़े अन्य निर्णयों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करें। साथ ही प्रत्येक कानून लागू करने से पहले "जनहित समीक्षा" सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि "देश की आम जनता पुकार-पुकार कर रही है— हम कहीं नहीं हैं मीलॉर्ड!" समिति ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया भी मजबूर है और देश में मनी-मस्कुलर पावर का खेल चल रहा है। समिति के अनुसार नेता एवं माफिया नहीं चाहते कि बजरी तथा अन्य लाइसेंस प्रक्रिया पर लगी रोक हटे। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने जनहित में नीतिगत और न्यायिक स्तर पर व्यापक पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया है।

Pratahkal Bureau
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