सनातन पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत रविवार को श्री हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के तत्वावधान में धार्मिक आयोजनों का भव्य शुभारंभ विशाल कलश यात्रा के साथ हुआ। इसके बाद हरी शेवा धाम में श्री विष्णु यज्ञ, हरि सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक, श्रीराम कथा, हरिनाम संकीर्तन एवं काशी की तर्ज पर गंगा आरती सहित विविध अनुष्ठानों की शुरुआत की गई, जो पूरे पुरुषोत्तम माह तक निरंतर आयोजित होंगे।

कलश यात्रा का शुभारंभ बालाजी मार्केट स्थित बालाजी मंदिर से संत-महंतों के सानिध्य में हुआ, जिसमें महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर धार्मिक गीतों के साथ सहभागिता की। यात्रा में हरी शेवा धाम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज, निंबार्क आश्रम के महंत मोहन शरण जी शास्त्री, काठिया बाबा बनवारी शरण जी, संत मायाराम जी, संत गोविंदराम जी, महंत रामदास जी रामायणी तथा पंडित मुरारी पांडे सहित अनेक संतजन उपस्थित रहे। मुख्य यजमान जयराम दास, वर्षा एवं अभीचंदानी परिवार (अहमदाबाद) विशेष रूप से यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर गोल प्याऊ चौराहा, सरकारी दरवाजा, बाजार नंबर 3, पुराना शिक्षा विभाग एवं वीर सावरकर चौक होते हुए हरी शेवा धाम पहुंची, जहां विधि-विधान से कलश स्थापना की गई।

कलश यात्रा में पल्लवी वच्छानी, अलका जोशी, खुशबू शुक्ला, मनीषा जाजू, रेखा सोनी, मंजू तंबोली, वर्षा सखरानी, वर्षा मोटवानी, शिवानी भरावा एवं दुर्गा शक्ति अखाड़ा की कविता छीपा सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं अखाड़े की बहनों ने सहभागिता निभाई।

इसके पश्चात आचार्य पंडित रोशन शास्त्री के सानिध्य में श्री विष्णु महायज्ञ तथा उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के मुखारविंद से सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक प्रारंभ हुआ। यज्ञ में मुख्य यजमान जयराम दास, वर्षा अभीचंदानी (अहमदाबाद), बड़ौदा की कोशी नौतानी, संत मायाराम एवं अशोक मूंदड़ा सहित श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं।

दोपहर में हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास जी महाराज के मुखारविंद से श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। कथा में उन्होंने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में परमात्मा का नाम ही मनुष्य को सद्गति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भूलवश भी यदि कोई भगवान का नाम ले लेता है तो उसका जीवन कल्याण की ओर अग्रसर हो जाता है। उन्होंने बताया कि प्रभु नाम से ही सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास जी उदासीन ने सनातन परंपरा में श्रीराम कथा की महिमा का वर्णन करते हुए भगवान गणेश, माता सरस्वती तथा अपने उदासीन संप्रदाय के आदि-गुरु श्री चंद्र भगवान एवं गुरुदेव का स्मरण किया। उन्होंने कहा “बिनु गुरु कृपा होइ न ज्ञान”, अर्थात गुरु कृपा के बिना ईश्वर कथा का ज्ञान संभव नहीं है। उन्होंने मंगलाचरण, कथा की निर्विघ्न समाप्ति और श्रोताओं की शुद्धि का महत्व बताया।

उन्होंने आगे कहा कि राम कथा केवल कहानी नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है, यह भव-रोग की दवा और मानसिक तनाव, अहंकार व दुखों को दूर करने वाली संजीवनी है। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख क्षणिक हैं, जबकि वास्तविक शांति केवल राम नाम और कथा श्रवण से ही प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने माता सती, माता पार्वती और भगवान शिव के संवाद के माध्यम से राम के ब्रह्म स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम ही सच्चिदानंद स्वरूप, अजन्मा और सर्वव्यापक ब्रह्म हैं जो भक्तों के प्रेमवश अवतार लेते हैं।

महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि “बिनु सतसंग बिबेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई”, अर्थात सत्संग और कथा श्रवण दुर्लभ है और यह केवल प्रभु कृपा से ही प्राप्त होता है।

कार्यक्रम की सेवा में सुरेश गोयल, चांदमल सोमानी, हीरालाल गुरनानी, रविंद्र जाजू, हनुमान अग्रवाल, हेमनदास भोजवानी, रमेश मूंदड़ा, बाबूलाल गायकवाड़ एवं बाबूलाल टाक सहित अनेक गणमान्यजन सक्रिय रहे।

पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आगामी कार्यक्रमों में प्रतिदिन प्रातः 7 बजे श्री विष्णु यज्ञ, प्रातः 10 बजे रुद्राभिषेक, 25 मई तक दोपहर 3 से 6 बजे तक श्रीराम कथा आयोजित होगी। 26 से 30 मई तक भक्तमाल कथा व्यासपीठ पर स्वामी जगद्गुरु ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज के सानिध्य में होगी। 31 मई को पंडित गौरीशंकर शास्त्री के सानिध्य में सत्यनारायण कथा एवं पूर्णिमा उद्यापन होगा। 1 से 7 जून तक जबलपुर के स्वामी अशोक नंद जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा तथा 8 से 14 जून तक काशी के डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज के सानिध्य में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। 15 जून को संत समागम, यज्ञ पूर्णाहुति, पाठ-पारायण पूर्णाहुति, गंगा आरती एवं रामधुन विश्राम के साथ महोत्सव का भव्य समापन किया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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