भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर महाराज ने जीवन में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और कषायों से मुक्ति को सुखी परिवार और आत्मकल्याण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की सोच ही घर को स्वर्ग या नरक बनाती है। जब तक क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग नहीं होगा, तब तक धार्मिक क्रियाएं भी कल्याणकारी नहीं बन सकतीं। अपनी सोच बदलने और दूसरों के प्रति भेदभाव मिटाने से ही जीवन और पारिवारिक संबंधों में सुधार संभव है।

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर, शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज की मंगल दिव्य देशना गुरुवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में जारी रही। अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘जीवन जीने की कला’ के दूसरे दिन आचार्यश्री ने कहा कि ‘मैं ही सही, दूसरे गलत हैं’ जैसी सोच कषायों को बढ़ाती है। जब तक बुरी बात बुरी नहीं लगेगी, तब तक सुधार भी नहीं आएगा। जीवन में निंदा या प्रशंसा से अधिक महत्व इस बात का है कि उसे कौन कर रहा है।

आचार्यश्री ने कहा कि जब तक घर स्वर्ग नहीं बनेगा, तब तक मंदिर में भी स्वर्ग नहीं बन पाएगा। भीतर की भेदभावपूर्ण लकीरें मिटाए बिना पूजा, अर्चना और वंदना मोक्ष नहीं दिला सकतीं। यदि मन के भीतर की लकीरें मिट रही हैं, तो धार्मिक क्रिया धर्म है, लेकिन भीतर कषाय बने हुए हैं, तो वह क्रिया धर्म नहीं हो सकती। धार्मिक क्रियाएं क्रोध से नहीं, बल्कि समताभाव से होनी चाहिए। जो व्यक्ति बुरा नहीं सोचता, वह बुरा सुन भी नहीं सकता, बुरा कर भी नहीं सकता और बुरा बोल भी नहीं सकता।

उन्होंने कहा कि कषाय रहित क्रिया धर्म है, जबकि कषाय सहित क्रिया पाप का कारण बनती है। धर्म को जानने के बाद भी यदि कषायों का त्याग नहीं किया जाता, तो धर्मात्मा होने का कोई लाभ नहीं है। संत बनकर कषाय करने वालों को अधिक पाप लगता है। किसी पर संदेह करना भी मिथ्यात्व है। आचार्यश्री ने कहा कि जब व्यक्ति को खुद पर ही विश्वास नहीं है, तो आत्मकल्याण के लिए की जा रही धार्मिक क्रियाओं पर विश्वास कैसे होगा।

उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी संतान पर भी विश्वास नहीं होता। जब स्वयं पर विश्वास नहीं होगा, तो यह दृढ़ता से नहीं कहा जा सकता कि हम नरक में नहीं जाएंगे। लोग प्रतिदिन मंदिर जाते हैं, लेकिन उन्हें यह विश्वास नहीं होता कि धर्म करने से मोक्ष मिल जाएगा। यदि व्यक्ति को खुद पर विश्वास हो, तो दुनिया की कोई ताकत उसे विचलित नहीं कर सकती।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने धर्म के प्रति अडिग विश्वास रखने का संदेश देते हुए कहा कि मिथ्यात्व और भ्रम दूर होने पर सम्यक दर्शन होता है। धर्म पर विश्वास होगा, तो धार्मिक क्रियाएं कल्याण करेंगी, अन्यथा वे केवल लकीरें बढ़ाने का काम करेंगी। माता-पिता और बच्चों के बीच आपसी विश्वास नहीं होगा, तो परिवार में सुख-शांति कैसे बनी रहेगी। गलत कार्य का समर्थन करने पर व्यक्ति की दशा भी उस कार्य को करने वाले के समान हो जाती है।

पारिवारिक संबंधों में भेदभाव पर उन्होंने कहा कि जो बेटी-बहू और सास-बहू के बीच भेद करता है, वह आत्मा का कल्याण कैसे कर सकता है। बच्चे हों या बड़े, वे दूसरों के कारण नहीं, बल्कि अपनी सोच के कारण बिगड़ते हैं। उन्होंने कहा कि बेटी जवाब दे तो बुरा नहीं लगता, लेकिन बहू जवाब दे तो बुरा लगता है। बेटी अपने सुख-दुख की बातें करे, तो बुरा नहीं लगता, लेकिन बहू अपनी मां से वैसी ही बातें करे, तो बुरा लग जाता है। ऐसी मानसिक लकीरों को बदलना जरूरी है। सोच में गड़बड़ी ही पारिवारिक संबंधों पर प्रतिकूल असर डालती है।

श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन के प्रारंभ में पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य पुलक सागर चातुर्मास समिति तथा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।

चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री की दिव्य देशना होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)

अनुभव: 6 माह

परिचय 

अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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