पुलकसागर महाराज बोले- भीलवाड़ावालों से न नोट चाहिए, न वोट, चाहिए जीवन की खोट
पुलकसागर महाराज के भीलवाड़ा चातुर्मास का मंगल कलश स्थापना से शुभारंभ, जानिए प्रवचन और ज्ञान गंगा महोत्सव की पूरी जानकारी।

तस्वीर में भीलवाड़ा में आयोजित चातुर्मास कलश स्थापना समारोह के दौरान मंच पर खड़े श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति नजर आ रहे हैं।
राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज के भीलवाड़ा में पहली बार आयोजित चातुर्मास का विधिवत शुभारंभ रविवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में मंगल कलश स्थापना समारोह के साथ हुआ। शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल से नगर निगम के चित्रकूटधाम तक निकाली गई भव्य मंगल कलश शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन में भीलवाड़ा सहित राजस्थान और देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित चातुर्मासिक मंगल कलश स्थापना समारोह में मुख्य कलश पुण्यार्जक तिलोकचंद छाबड़ा एवं सुरेन्द्र सुराणा परिवार रहे। चातुर्मास के पुण्यार्जक दिलीप, प्रवीण नवीन चौधरी परिवार, नंदलाल सुरेश कोठारी परिवार, सुशील सुनील लोकेन्द्र जैन परिवार, गुलाबचंद मनीष शाह परिवार और निहालचंद लोकेश अजमेरा परिवार रहे। इनके साथ 100 श्रावक परिवारों को भी चातुर्मास कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रवचन के दौरान आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि कलश स्थापना के साथ आपके कर्तव्य पूर्ण हो गए हैं, अब कर्तव्य हमारे हैं। आज से चातुर्मास की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने कहा, "मुझे भीलवाड़ावालों से न नोट, न वोट, न सपोर्ट चाहिए, मुझे तो बस केवल तुम्हारी जिंदगी की वह खोट चाहिए जो तुम्हें चैन की नींद नहीं सोने देती है।"
आचार्यश्री ने कहा कि वह खोट चाहिए जहां एक घर दूसरे घर से बोला नहीं करते और दिलों में खड़ी दीवारों को गिराने का अवसर चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रतिदिन 24 घंटे में से केवल एक घंटा चाहिए, यदि यह समय मिल गया तो वह लोगों के 23 घंटे सार्थक करने का वचन देते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसी बातें करेंगे जिससे लोगों को जिंदगी जीने का आनंद मिल सके।
पुलकसागर महाराज ने कहा कि वह चातुर्मास में सोफासेट, डायमंड सेट या भौतिक वस्तुओं से मतलब नहीं रखते, बल्कि मन को सेट करने आए हैं। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा से जाने से पहले ज्ञान गंगा महोत्सव के माध्यम से लोगों के मन को परिवर्तित कर जाएंगे। मन सेट हो गया तो सब कुछ सेट हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनके प्रवचनों में पुराणों की नहीं बल्कि जिंदगी के अफसानों की बात होगी। पुराणों की बात इधर से सुनकर उधर निकल जाती है, लेकिन प्राण की बात सुनने पर वह एक प्राण से दूसरे प्राण में समा जाती है। जब प्राण की बात की जाती है तो भीलवाड़ावालों को समझना चाहिए कि चातुर्मास करना और कराना सार्थक हो गया।
आचार्यश्री ने कहा कि वह भीलवाड़ा नगरी में आए हैं, इसलिए उनसे ज्यादा अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। जब तक लोग स्वयं तैयार नहीं होंगे, तब तक वह कुछ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया को नहीं बल्कि खुद को बदलने का प्रयास करना है। चित्रकूटधाम में 15 से 30 अगस्त तक ज्ञान गंगा महोत्सव में परिवर्तन, चिंतन, जीवन को दिशा देने और अपने से मिलने के विषयों पर प्रवचन होंगे।
उन्होंने कहा कि कलश केवल जल का पात्र नहीं है, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और जीवन परिवर्तन का प्रतीक है। चातुर्मास आत्मनिरीक्षण और संयम की साधना का पर्व है। उन्होंने लोगों से अपने घर में प्रेम का दीपक जलाने का प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंगल कलश लेने वालों का भी और नहीं लेने वालों का भी मंगल होगा।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि इन कलशों में विभिन्न प्रकार की मांगलिक सामग्रियां, जड़ी-बूटियां और पिरामिड आदि रखे गए हैं, जो घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरते हैं। इन कलशों की विधिवत पूजा कर सोमवार को चातुर्मास स्थल सूर्यमहल में स्थापित किया जाएगा।
चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि आयोजन में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। मंगल कलश शोभायात्रा जब सूर्यमहल से चित्रकूटधाम के लिए रवाना हुई तो जय गुरुदेव के जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
शोभायात्रा में मुख्य कलश स्थापना करने वाले तिलोकचंद छाबड़ा एवं सुरेन्द्र सुराणा परिवार विंटेज कार में सवार थे। ग्यारह लाख एवं पांच लाख के पुण्यार्जक परिवारों के दो-दो सदस्य मंगल कलश लेकर बग्गियों में बैठे थे। समारोह में कई गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे।
भव्य आयोजन में आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, पूजन और आरती का पूरा सौभाग्य संघपति प्रदीप मामा एवं कल्पना मामी ने प्राप्त किया। इससे पूर्व सुबह 9 बजे चातुर्मास स्थापना पर ध्वजारोहण का सौभाग्य संतकुमार, विपुल और अतुल पाटनी परिवार को मिला।
आयोजन को सफल बनाने में मुख्य रूप से पीयूष गोधा, लोकेश अजमेरा, रवि चौधरी, प्रेमचंद सेठी, अनिल पाटनी, जयकुमार पाटनी, भूमिका जैन, तनुजा टोंग्या और सुनीता पाटनी सहित पूरे समाज का योगदान रहा। भोजन व्यवस्था आदिनाथ नवयुवक मंडल के नेतृत्व में भीलवाड़ा के सभी मंडलों ने संभाली।
चातुर्मासिक मंगल कलश स्थापना के बाद पूज्य पुलकसागरजी महाराज के सानिध्य में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन 3 अगस्त से प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में होंगे। चातुर्मास का प्रमुख आकर्षण ज्ञान गंगा महोत्सव रहेगा, जो 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में आयोजित किया जाएगा।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस, 19 अगस्त को मोक्ष सप्तमी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर विशेष आयोजन होंगे। चातुर्मास और ज्ञान गंगा महोत्सव के माध्यम से भीलवाड़ा में आध्यात्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला आगे बढ़ेगा।

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