भीलवाड़ा में सतगुरु स्वामी टेऊॅराम जी महाराज का 140वां जन्मोत्सव श्रद्धा के साथ सम्पन्न, 140 दीप प्रज्ज्वलित
प्रेमप्रकाश आश्रम, भीलवाड़ा में सतगुरु स्वामी टेऊॅराम जी महाराज का 140वां जन्मोत्सव पांच दिवसीय कार्यक्रमों, 140 दीप, प्रवचन और भंडारे के साथ सम्पन्न हुआ।

तस्वीर में भीलवाड़ा के प्रेमप्रकाश आश्रम में सतगुरु स्वामी टेऊॅराम जी महाराज के 140वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं एवं पुरुष दिखाई दे रहे हैं।
प्रेमप्रकाश आश्रम, भीलवाड़ा में सतगुरु स्वामी टेऊॅराम जी महाराज का 140वां जन्मोत्सव पांच दिवसीय कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों, भजन कार्यक्रमों और भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर पिछले 40 दिनों से चल रहे चालीसा महोत्सव का भी समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रेमप्रकाश आश्रम, ब्यावर से पधारे संत शम्भूलाल ने अपने प्रवचन में कहा कि जिस परिवार में संत का जन्म होता है, उस परिवार के सात कुल तर जाते हैं। उन्होंने कहा कि संत अपने माता-पिता, गांव और देश का नाम रोशन करते हैं। उन्होंने बताया कि सतगुरु स्वामी टेऊॅराम जी महाराज का जन्म 6 जुलाई 1887 को अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के खण्डु ग्राम में माता कृष्णादेवी एवं पिता चेलाराम के आंगन में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने गुरु आसुराम जी से नामदान की दीक्षा ग्रहण की और वे सदैव ईश्वर की भक्ति में लीन रहे। उन्होंने प्रेमप्रकाश पंथ तथा प्रेमप्रकाश ग्रंथ का निर्माण किया और जीवन पर्यन्त सनातन धर्म का देश-विदेश में प्रचार-प्रसार किया।
संत शम्भूलाल ने अपने प्रवचन में कहा कि सत्संग में आना सौभाग्य की बात है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय सत्संग के लिए अवश्य निकालना चाहिए तथा आचार्य द्वारा बताई गई शिक्षाओं को ग्रहण करने पर ही जन्मोत्सव मनाना सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 40 दिनों से चल रहे चालीसा महोत्सव का भी इस अवसर पर समापन हुआ।
कार्यक्रम के दौरान प्रेमप्रकाश ग्रंथ के पाठों का भोग लगाया गया। 140 व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया तथा 140 दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इसके साथ ही भजन अंताक्षरी का आयोजन किया गया और केक काटकर बधाई गीतों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अंत में श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया।
संत शम्भूलाल जी के भीलवाड़ा स्थित कुमुद विहार-3 पहुंचने पर परमानन्द गुरनानी, किशोर गुरनानी, राजकुमार गुरनानी एवं राहुल परमानन्दानी ने उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर हीरालाल गुरनानी, वीरूमल पुरसानी, निर्मल आहूजा, फतनदास लालवानी, हरीकिशन टहलयानी, मोनू मोरवानी, विजय थावानी, गिरीश गांधी, जय सबनानी, मोहनदास तुलसियानी, ताराचन्द थुरवानी, मनोज रामचन्दानी, ओमप्रकाश गुलाबानी, मोहन लुधानी, निर्मल चेलानी, राजेन्द्र हेमनानी, आसनदास लिमानी, गंगाराम पेसवानी, कमल वैश्नानी, नवीन गांधी, दीपू सभनानी, गोविन्द सामतानी, रवि धनकानी, सतीश चान्दवानी तथा नीमच एवं ब्यावर से आए अनेक प्रेमी उपस्थित रहे। इस आयोजन में श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया और जन्मोत्सव का समापन श्रद्धा एवं उत्साह के वातावरण में हुआ।

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