क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद राहत नहीं, उपभोक्ता अधिकार समिति ने केंद्र सरकार से मांगी ईंधन व गैस दरों में कटौती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 33 प्रतिशत गिरावट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतों में राहत नहीं मिलने पर उपभोक्ता अधिकार समिति ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर बड़ी मांग उठाई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बाद पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दामों में कटौती की मांग को लेकर आवाज उठाने वाली उपभोक्ता अधिकार समिति का आधिकारिक प्रतीक चिह्न।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में अपेक्षित राहत नहीं मिलने को लेकर उपभोक्ता अधिकार समिति राजस्थान ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की है। समिति ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री सहित संबंधित केंद्रीय संस्थाओं को ज्ञापन भेजकर ईंधन एवं रसोई गैस की कीमतों में तत्काल कटौती की मांग की है।
समिति के केंद्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. अशोक सोडाणी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल से घटकर वर्तमान में 76 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। उनके अनुसार यह लगभग 33 प्रतिशत की कमी है, जिसके अनुरूप आम उपभोक्ताओं को भी प्रत्यक्ष राहत मिलनी चाहिए।
डॉ. सोडाणी ने कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, तब पेट्रोल और डीजल की दरों में वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का हवाला दिया गया था। ऐसे में अब कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में न्यूनतम 30 रुपये प्रति लीटर तथा घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपये की कटौती की जानी चाहिए।
समिति ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि महंगाई का सीधा असर आम नागरिकों, किसानों, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों और गृहिणियों पर पड़ रहा है, जबकि तेल कंपनियों के मुनाफे में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। समिति का कहना है कि मूल्य निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
ज्ञापन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में न्यूनतम 30 रुपये प्रति लीटर की कटौती, घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपये की राहत तथा तेल कंपनियों के मुनाफे को सार्वजनिक करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है। समिति का मानना है कि इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और मूल्य निर्धारण प्रणाली अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
यह ज्ञापन केंद्रीय सचिव एडवोकेट प्रहलाद राय व्यास, केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी तथा केंद्रीय महिला अध्यक्ष मधु जाजू के नेतृत्व में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्री और विभिन्न तेल कंपनियों को भेजा गया है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। ऐसे में ईंधन और गैस की बढ़ती लागत को लेकर उठी यह मांग आने वाले दिनों में उपभोक्ता हितों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उभर सकती है।

Pratahkal Bureau
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