भीलवाड़ा में वीरांगना पन्नाधाय की मूल ऐतिहासिक एवं सामाजिक पहचान में किए गए कथित गलत व भ्रामक बदलाव को लेकर विरोध तेज हो गया है। केंद्र सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ’भारत के नारी रत्न8’ में पन्नाधाय की पहचान बदलकर ’खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी’ दर्शाए जाने के विरोध में राष्ट्रीय बजरंग दल और श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने आपत्ति जताई है।

राष्ट्रीय बजरंग दल, भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष रितेश गुर्जर एवं श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष धनराज सिंह अमरतिया के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पुस्तक में तत्काल संशोधन करने की मांग की।

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश सचिव महीपाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रकाशन विभाग की पुस्तक ’भारत के नारी रत्न8’ के संपादक ऋतुश्री हैं। पुस्तक का आईएसबीएन 978-93-5409-692-1 है और इसका आठवां पुनर्मुद्रण 2022 में हुआ है। पुस्तक के पृष्ठ संख्या 08 पर वीरांगना पन्नाधाय की जीवनी प्रकाशित की गई है। इसमें उनकी मूल ऐतिहासिक पहचान (गुर्जर समाज) को बदलकर ’खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी’ दर्शाया गया है।

राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलामंत्री पवन व्यास ने कहा कि पन्नाधाय का जीवन संपूर्ण राष्ट्र के लिए त्याग, स्वामिभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास के स्थापित तथ्यों को बदलकर प्रस्तुत करना महान बलिदानी का अनादर है। इससे गुर्जर समाज सहित विभिन्न वर्गों में गहरा असंतोष है। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य इतिहास की प्रामाणिकता और सत्यता को अक्षुण्ण बनाए रखना है।

ज्ञापन में मांग की गई कि पुस्तक ’भारत के नारी रत्न’ के पृष्ठ 08 पर प्रकाशित भ्रामक विवरण को हटाकर प्रामाणिक ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अविलंब संशोधन किया जाए। साथ ही उच्चस्तरीय समीक्षारू इतिहासकारों, विषय विशेषज्ञों एवं संबंधित समाज के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने पन्नाधाय सर्किल पर पन्नाधाय की मूर्ति विधि-विधान के साथ लगाए जाने की भी मांग की। इसके अलावा जांच एवं संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक विवादित पुस्तक के आगामी संस्करणों व पुनर्मुद्रण के वितरण पर तत्काल रोक लगाने तथा राष्ट्रीय एवं ऐतिहासिक महत्व की विभूतियों से जुड़े साहित्य के प्रकाशन से पूर्व प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों का अनिवार्य सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग रखी।

इस दौरान बालमुकुंद प्रजापत, पवन व्यास, राहुल जाट, अरविन्द सिंह, सोनू प्रजापत, भरत सिंह, नवीन गाडरी, पूरण मल, बनवारी गाडरी, लोकपाल, जितेन्द्र गुर्जर, लोकेश खटीक, धनराज सिंह, महावीर सिंह, महेन्द्र सिंह, हेमेन्द्र सिंह, दशरत सिंह, लाल सिंह, महिपाल सिंह, जालम सिंह, पृथ्वीराज नकवाल, विजय सिंह, शुभम सिंह, बंटी सिंह आदि उपस्थित थे।

Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

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अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

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अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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