पंडित प्रदीप मिश्रा की भीलवाड़ा शिव महापुराण कथा में उमड़ा जनसैलाब
भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड में 'कुबेर भंडारी' की कथा के तीसरे दिन लाखों श्रद्धालु जुटे, महाराज ने माता-पिता की सेवा और शिव पूजन का महत्व बताया।

मेवाड़ की पावन धरा भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन आस्था का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। प्रख्यात कथावाचक 'कुबेर भंडारी' पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारबिंद से शिव महिमा श्रवण करने के लिए जनमैदिनी इस कदर उमड़ी कि साढ़े चार लाख वर्ग फीट में फैला विशाल डोम और पाइप पांडाल छोटा पड़ गया। हालात यह थे कि पांडाल के बाहरी क्षेत्रों में भी तिल रखने की जगह नहीं बची और सैकड़ों श्रद्धालु भीषण गर्मी के बावजूद बाहर खड़े होकर तल्लीनता से कथा सुनते नजर आए। संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धर्मोत्सव में पंडित मिश्रा ने जीवन दर्शन का सार साझा करते हुए कहा कि यदि मनुष्य अपनी जिंदगी का परिणाम बदलना चाहता है, तो उसे प्रणाम करना प्रारंभ कर देना चाहिए। उन्होंने 'श्री शिवाय नमस्तुभयं' मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि बार-बार महादेव को प्रणाम करने से जीवन के दुख मिटते हैं और सुखों का आगमन होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसार में पूजनीय बनने के लिए पूजन अनिवार्य है और हमारी अटूट आस्था ही पत्थर की मूर्ति को भगवान का रूप देती है।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने गृहस्थ जीवन की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत बनना सरल है, किंतु पारिवारिक झंझटों के बीच भगवान का भजन करते हुए गृहस्थ धर्म निभाना अत्यंत कठिन है। उन्होंने भीलवाड़ावासियों की सराहना करते हुए उन्हें भाग्यशाली बताया जो व्यस्तता के बीच प्रतिदिन तीन घंटे शिव भक्ति के लिए निकाल रहे हैं। उपवास की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि अपने भावों को परमात्मा से जोड़ना ही सच्चा उपवास है, जिसके लिए नयन, इंद्रियों, वाणी, जिह्वा और श्रवण का संयम आवश्यक है। कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ पर पंडित मिश्रा का अभिनंदन महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज और महंत लक्ष्मणदास त्यागी ने किया। इस अवसर पर स्वायत्त शासन मंत्री झाबरसिंह खर्रा एवं विधायक गोपाल खंडेलवाल ने भी महाराजश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान मुख्य यजमान श्रीगोपाल राठी, अशोक बाहेती, रामेश्वरलाल काबरा सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी ने आभार व्यक्त किया।
सामाजिक संदेश देते हुए पंडित मिश्रा ने युवाओं को माता-पिता की सेवा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि जो संतान माता-पिता से छुपाकर कुछ खाती है, वह चोर की श्रेणी में आती है। बुजुर्ग और बच्चे समान होते हैं, अतः उनकी इच्छाओं का सम्मान करना और उनकी दुआएं लेना ही सफलता का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान शिव और सूर्यदेव ही ऐसे देव हैं जिन्हें नियमित जल अर्पित किया जाता है। शिव देवाधिदेव हैं, अतः उन्हें समर्पित एक लोटा जल ३३ करोड़ देवी-देवताओं तक पहुँच जाता है और वास्तुदोष, पितृदोष व कालसर्प दोष जैसे कष्टों का निवारण करता है। कथा के दौरान 'तेरे डमरू की धुन सुनकर मैं काशी नगरिया आई हूं' जैसे भजनों पर हजारों महिला श्रद्धालु झूम उठीं। महाराजश्री ने मंजू पाटोदिया, प्रियंका शर्मा और सुनीता सोनी सहित कई श्रद्धालुओं के पत्रों का वाचन कर उनके जीवन में आए चमत्कारी बदलावों को साझा किया और उन्हें मंच पर बुलाकर बिल्व पत्र भेंट किए।
आयोजन समिति के संयोजक गजानंद बजाज ने सूचित किया कि कथा १४ अप्रैल तक दोपहर २ से ५ बजे तक निरंतर चलेगी। सुरक्षा की दृष्टि से श्रद्धालुओं से कीमती आभूषण पहनकर न आने और अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करने की अपील की गई है। कथा स्थल के आसपास सेवा का अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां विभिन्न सामाजिक संगठन और परिवार भोजन, शीतल जल, चाय और बिस्कुट के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं। पूरा भीलवाड़ा शहर वर्तमान में शिवमय होकर भक्ति की रसगंगा में गोता लगा रहा है।

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