भारत की संसद के ऐतिहासिक संविधान सदन में आयोजित 12वें BRICS संसदीय मंच, 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जन-केंद्रित विकास के लिए संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों को आपसी संवाद, विश्वास और सहयोग के माध्यम से अपनी साझा प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदलना होगा। संसदें कानून निर्माण, बजट, विचार-विमर्श और निगरानी के जरिए इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

ओम बिरला ने भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्यों, भारत सरकार के मंत्रियों, राज्य विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों और सांसदों का भी अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति BRICS संसदीय सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता, संवाद, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास का प्रतीक है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है और वैश्विक घटनाक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता भी बढ़ रही है। BRICS देश दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये देश विश्व के लगभग एक-तिहाई भू-क्षेत्र में फैले हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति BRICS की सामूहिक शक्ति और वैश्विक उत्तरदायित्व को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि BRICS के सदस्य देश भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक दृष्टि से अलग-अलग हैं, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी उन्हें एक सूत्र में बांधती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित BRICS राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में संयुक्त वक्तव्य का सर्वसम्मति से स्वीकृत होना एक बड़ी उपलब्धि है। बिरला ने इसके लिए BRICS देशों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि अब इन प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदलने की आवश्यकता है। कानून निर्माण, बजट, विचार-विमर्श और निगरानी के माध्यम से संसदें इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए ओम बिरला ने कहा कि दुनिया क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहता। ऐसे समय में संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग का महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसदें आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने तथा वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र संवाद, वैचारिक भिन्नता और सहमति-असहमति के बावजूद परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है। इसी लोकतांत्रिक शक्ति के आधार पर भारत अपनी विकास यात्रा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय संसद ने अपने विधायी ढांचे का उपयोग करते हुए ऐसी नीतियां और कानून बनाए हैं, जिनसे राष्ट्र की बहुआयामी प्रगति के लिए ठोस आधार तैयार हुए हैं।

ओम बिरला ने कहा कि BRICS का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाना है। इसके लिए जरूरी है कि साझा आकांक्षाएं केवल विमर्श तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में भी दिखाई दें।

उन्होंने 12वें BRICS संसदीय मंच के विषय “जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना” को विशेष महत्व का बताया। इस विषय पर दो दिनों में चार प्रमुख क्षेत्रों रेजिलिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा और व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

संसदीय संस्थाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बिरला ने कहा कि ऐसी संस्थाओं का निर्माण होना चाहिए, जो चुनौतियों के बीच विधायी निरंतरता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निगरानी सुनिश्चित कर सकें। संसदें जीवंत संस्थाएं हैं और उन्हें जन-अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को ढालना चाहिए। इसके लिए कार्यप्रणाली में नवाचार अपनाने के साथ संवाद, सहमति, पारदर्शिता और जवाबदेही की परंपराओं को मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संसदीय संदर्भ में नवाचार का अर्थ लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, सहभागी और जन-केंद्रित बनाने के लिए नए विचारों तथा कार्यपद्धतियों को विकसित करना भी है।

संसदीय सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इसकी वास्तविक शक्ति विविधताओं को सामूहिक प्रगति की ताकत में बदलने में है। संसदों को अपने विचार और अनुभव साझा करने चाहिए, साझा चुनौतियों के समाधान तलाशने चाहिए तथा एक-दूसरे की क्षमताओं और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने ऐसे समाधान विकसित करने की आवश्यकता बताई, जो नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं और अधिक न्यायसंगत, समावेशी तथा शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में सहायक हों।

विकास और पर्यावरण के संबंध पर उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में दोनों को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। यह दृष्टिकोण BRICS देशों की संसदों के लिए भी मार्गदर्शक होना चाहिए।

युवाओं की आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी आकांक्षी है और उसके पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा तकनीकी ज्ञान है। युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर मिलने चाहिए और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्राप्त होना चाहिए। संसदों का दायित्व है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं को समझें, उनकी आवाज को स्थान दें और उनकी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।

उन्होंने कहा कि संसदीय कूटनीति की वास्तविक शक्ति अपनी-अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को शामिल करने में है। देशों को अपने अनुभवों को साझा कार्रवाई, आपसी समझ को विश्वास और संवाद को ठोस सहयोग में बदलना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए ओम बिरला ने कहा कि BRICS को “समाधानों का ecosystem” बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संगठन की सफलता केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि उनसे निकलने वाले ठोस परिणामों से मापी जाएगी।

उन्होंने मंच के माध्यम से साझा भविष्य का एजेंडा तैयार करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। बिरला ने कहा कि देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां और दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी आकांक्षाएं समान हैं। इनमें शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर और नागरिकों के लिए बेहतर जीवन शामिल हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि BRICS संसदीय मंच, 2026 सदस्य देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करेगा तथा अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान देगा। उन्होंने कहा कि BRICS की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता और उस विविधता को साझा उद्देश्य में बदलने की क्षमता में निहित है।

उन्होंने संसदीय सहयोग के माध्यम से ऐसी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया, जिससे सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़े और उनकी सामूहिक शक्ति के आधार पर वैश्विक संस्थाएं अधिक न्यायसंगत तथा मानवता की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी बनें।

अपने संबोधन के समापन में ओम बिरला ने विश्वास जताया कि मंच पर होने वाला विचार-विमर्श आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देगा तथा जन-केंद्रित विकास के साझा संकल्प को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि सदस्य देश मिलकर ऐसी संसदीय साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं, जो शांति, समृद्धि और सतत विकास के नए अवसर प्रदान करे तथा जनता की आकांक्षाओं को साकार करने में योगदान दे। इसी विश्वास और साझा संकल्प के साथ उन्होंने 12वें BRICS संसदीय मंच की सफलता की कामना की और सभी को धन्यवाद दिया।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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