भीलवाड़ा के राधाकृष्ण मंदिर पार्क, कमला विहार में नानीबाई रो मायरो महोत्सव सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा के तीसरे दिन भक्ति की सरिता बही। कथा आयोजक रामचन्द्र व्यास ने बताया कि इस पावन अवसर पर रामपाल सोनी, डॉ. छैलबिहारी जोशी, डॉ. सविता जोशी, श्रीनाथ मंदिर आनन्दधाम हवेली से सुमन बाहेती, डी.के. दाधीच, दाधीच समाज संरक्षिका सरोज दाधीच, दधिमति मंदिर कमेटी अध्यक्ष हीरालाल ओझा, दिनेश दीवाना, अ.भा.दा.ब्रा. महासभा भीलवाड़ा जिलाध्यक्ष सावित्री शर्मा, महेश राठी, ललिता राठी, सत्यनारायण चित्तौड़, रघनुन्दन दाधीच, भंवर लाल लाठी, श्रीमती आशा ओझा, बद्रीलाल सोमाणी, रामेश्वर ईनाणी, कैलाश जागेटिया, नन्दकिशोर जोशी, रामचन्द्र मून्दड़ा, नारायण लाल, गोपाल लाल, मुरली मनोहर, सत्यनारायण शर्मा पुरानी पडासोली, शिव मंदिर सेवा समिति गुलाबपुरा के समस्त पदाधिकारी फतेहलाल कांठेड़, प्रमोद कुमार आचार्य, रामचन्द्र मून्दड़ा, रामपाल शर्मा, कृष्ण सिंह राजावत, इन्द्रा शर्मा, कोमल पाराशर, रेखा जैन एवं आयोजक मण्डल में कौशल्या दाधीच, रमेशचन्द्र दाधीच, अभिषेक दाधीच, पंकज दाधीच, अक्षय दाधीच, गोपाल दाधीच, गोपाल व्यास, सत्यनारायण दाधीच, राधेश्याम दाधीच, अजय दाधीच, मुरली दाधीच, रमेश व्यास, गोपाल जाट, प्रकाश दाधीच, सत्यनारायण दाधीच, दिनेश दाधीच, चन्द्रप्रकाश दाधीच, चेतन, भंवर लाल दाधीच, परमेश्वर पोरवाल, हरीश माहेश्वरी, निरंजन, महेश शर्मा, राधेश्याम व्यास, मुकेश व्यास, अजय व्यास सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित थे।

नरसी मेहता की उपेक्षा और भक्ति की शक्ति

समिति संयोजक रमेशचन्द्र दाधीच के अनुसार, व्यास पीठ से राष्ट्रीय कथावाचिका बाल व्यास सुश्री दीपा दाधीच ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि नरसी मेहता को नगर अंजार आये 4 दिन बीत गये परन्तु किसी ने भी उनकी सार-संभाल नहीं ली। जब श्री रंग जी को नरसी मेहता का पता लगा तो श्री रंग जी ने नरसी मेहता की आवभगत नहीं की। श्री रंग जी की पत्नी ने सोचा कि नरसी मेहता को आये 4 दिन बीत गये परन्तु हमने उनकी कोई सार-संभाल नहीं की, बेचारा नरसी 16 संतों के साथ भूखा-प्यासा मर जायेगा। तब श्री रंग जी की पत्नी ने नरसी मेहता को अपने महल में बुलवाया और उनके तिलक किया और नेक मांगा। नरसी मेहता ने कहा कि "हमारे पास तो लेने और देने के लिये भगवान राम का नाम और तुलसी जी की माला है।" श्री रंग जी पत्नी ने नरसी मेहता का तिलक पौंछ दिया।

श्रद्धा से बदला प्रकृति का नियम

जब नरसी मेहता ने स्नान करने के लिए पानी मांगा तो उन्हें ठण्डा पानी दे दिया गया। नरसी मेहता ने कहा "ब्याणजी थोडा पानी गर्म कर दो" तो नानीबाई की सासूजी नाराज हो गई और बोली "कभी ठण्डा, कभी गर्म।" नरसी मेहता ने भगवान को याद किया तो भगवान ने माघ के महिने में सावन ला दिया बहुत तेज बरसात हुई।

सांवरिया सेठ का नगर अंजार आगमन और मायरो

बाद में नरसी मेहता को श्रीरंग जी ने भोजन कराया और ठण्डी बासी खीचडी परोसी। नरसी मेहता ने जब भगवान के भोग लगाया तो खीचडी गरम हो गई व चावल खीर बन गए। उनको पता लगा कि मेरे डेरे में भगवान आऐ है तो वे भगवान से मिलने डेरे पर गऐ, वहां भगवान नहीं मिले। नरसी मेहता ने भगवान को पुकारा, तब भगवान ने नानी बाई के मायरे की व्यवस्था की। भगवान द्वारिका नगरी से राधा रूकमण के साथ नगर अंजार पधारे और भगवान ने नानी बाई के छप्पन करोड़ का मायरो भरा। अन्त में भगवान की आरती के बाद उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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