मोहर्रम की तैयारियों को अंतिम रूप, शांति और सद्भाव के साथ आयोजन पर जोर
भीलवाड़ा में आगामी मोहर्रम आयोजन को लेकर प्रबंधन कमेटी की अहम बैठक आयोजित हुई। जुलूस मार्ग, मुकाम, अखाड़ा प्रदर्शन और हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की परंपराओं पर विस्तृत चर्चा के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।

सीरत सराय में आयोजित मोहर्रम प्रबंधन कमेटी की बैठक के दौरान उपस्थित अधिकारी और लाइसेंसधारी आयोजन की तैयारियों तथा रूट चार्ट को लेकर चर्चा करते हुए।
आगामी दो दिवसीय मोहर्रम आयोजन को लेकर शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में सीरत सराय में मोहर्रम प्रबंधन कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के सभी लाइसेंसधारी मोहर्रम आयोजकों ने भाग लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में परंपरागत गरिमा, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखते हुए आयोजन संपन्न कराने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता शहर के मुख्य अकबरी अखाड़े के उस्ताद मोहम्मद आरिफ मेवाफरोश ने की, जबकि सुफियान कब्रिस्तान के सदर असलम पठान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उस्ताद मेवाफरोश ने सभी आयोजकों से अपील की कि मोहर्रम के कार्यक्रमों का आयोजन वर्षों पुरानी परंपराओं के अनुरूप शांति, अनुशासन और भाईचारे के वातावरण में किया जाए। उन्होंने पुलिस प्रशासन के निर्देशन और मार्गदर्शन में कानून व्यवस्था का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अकबरी अखाड़े के सचिव शाकीर नागौरी ने बताया कि शहर की विभिन्न कॉलोनियों से निकलने वाले लगभग 18 मोहर्रम जुलूस 25 जून, गुरुवार को अपने निर्धारित मार्गों से होते हुए धान मंडी पहुंचेंगे, जहां पहला मुकाम लगाया जाएगा। इसके बाद जुलूस रायजी मोड़ा की गली से होकर मंगला चौक पहुंचेगा, जहां अखाड़ा खेला जाएगा। आगे खारा कुआं की गली होते हुए सर्राफा बाजार में रात्रि करीब 3:30 बजे मुकाम लगाया जाएगा। इसके पश्चात सभी ताजियों को उनके-अपने मोहल्लों में ले जाकर ठहराया जाएगा।
दूसरे दिन शुक्रवार को सभी ताजिए दोपहर 12 बजे नीलगरों की मस्जिद बालाह पहुंचेंगे। जुमे की नमाज के बाद मोहर्रम का मुख्य मुकाम उठाया जाएगा, जो दोपहर लगभग 3:30 बजे बड़े मंदिर के गेट से गुजरते हुए सर्राफा बाजार पहुंचेगा। यहां अकबरी अखाड़ा कमेटी की ओर से सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक भाईचारे के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया जाएगा।
कमेटी के वरिष्ठ सदस्य अब्दुल मन्नान लोहार ने बताया कि दस्तारबंदी कार्यक्रम के उपरांत मोहर्रम का मुकाम पुनः मस्जिद नीलगरान पहुंचेगा। इसके बाद मगरिब की नमाज के पश्चात पटवारियों के मंदिर के बाहर वर्षों पुरानी हिंदू-मुस्लिम सद्भावना की परंपरा का निर्वहन करते हुए दोनों समुदायों की ओर से प्रसादी का आदान-प्रदान किया जाएगा। तत्पश्चात मोहर्रम का काफिला तेजाजी चौक स्थित हजरत मंसूर अली बाबा की दरगाह पहुंचेगा और वहां से बडला चौराहा स्थित कर्बला शरीफ में ताजियों को ठंडा करने की रस्म अदा की जाएगी, जिसकी व्यवस्था कर्बला कमेटी द्वारा की जाएगी।
बैठक में अमीरुद्दीन बिसायती, अशरफ शाह, सलीम भाई तगारी, मुजफ्फर हुसैन, राजू मिरासी, इरफान बागवान, यामीन कुरैशी, आसिफ पठान, हातिम अब्बासी, मोहम्मद यामीन नीलगर, राजू भाई भिसती, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक अयूब रंगरेज, कर्बला कमेटी के सदर फिरोज गौरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मोहर्रम आयोजन को लेकर आयोजित इस बैठक ने न केवल कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम स्वरूप दिया, बल्कि शहर में सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और परंपरागत मूल्यों को सशक्त बनाए रखने का संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau
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