विधायक कोठारी ने जैन संतों के विहार धाम हेतु भूमि आवंटन का मुद्दा उठाया
भीलवाड़ा विधायक ने विधानसभा में जैन साधु-साध्वियों की सुरक्षा के लिए विहार धाम बनाने और ऋषभ नवमी पर ऐच्छिक अवकाश घोषित करने की मांग सरकार के समक्ष रखी।

भीलवाड़ा, 10 मार्च। भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने राजस्थान विधानसभा में जैन समाज के साधु-साध्वियों के लिए विहार धाम हेतु भूमि आवंटन का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। पर्ची के माध्यम से उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि "जैन संत समाज की अनमोल धरोहर हैं और उनके विहार तथा चातुर्मास के लिए प्रदेश में उचित व्यवस्था होना आवश्यक है।"
विहार धाम के लिए भूमि आवंटन में आ रही बाधाएं
विधायक कोठारी ने कहा कि जैन साधु-साध्वियाँ वर्ष में लगभग आठ माह पैदल एक स्थान से दूसरे स्थान तक विहार करते हैं और वर्षाकाल के चार माह एक स्थान पर रहकर चातुर्मास के दौरान प्रवचन देते हैं। उनके पास न तो कोई आश्रम होता है और न ही वाहन, इसलिए विहार के दौरान उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त स्थानों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अपने संकल्प पत्र में जैन संतों के चातुर्मास हेतु भूमि आवंटित करने की घोषणा की थी। इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलात विभाग द्वारा विभिन्न आदेश भी जारी किए गए हैं, जिनमें जिला कलेक्टरों को जैन साधु-साध्वियों के विहार, ठहराव और प्रवचनों के लिए भूमि आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद राजस्व एवं स्वायत्त शासन विभाग के बीच समन्वय के अभाव तथा आदेशों में स्पष्टता नहीं होने के कारण दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजस्थान में विहार धाम के लिए भूमि आवंटन नहीं हो पाया है।
सुरक्षा चिंताएं और ऋषभ नवमी पर ऐच्छिक अवकाश की मांग
कोठारी ने कहा कि विहार धाम नहीं होने के कारण जैन साधु-साध्वियों को अत्यधिक दूरी तक पैदल विहार करना पड़ता है और कई बार इस दौरान दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आदेशों का सरलीकरण कर पूरे राजस्थान में जैन साधु-साध्वियों के विहार, ठहराव और प्रवचन के लिए विहार धाम हेतु शीघ्र भूमि उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही विधायक कोठारी ने यह भी मांग की कि "जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक ‘ऋषभ नवमी’ 12 मार्च 2026 के अवसर पर राज्य के विद्यालयों और महाविद्यालयों में भगवान ऋषभदेव के जीवन पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएं तथा इस दिन ऐच्छिक अवकाश घोषित किया जाए।"
खेलकूद विश्वविद्यालय और नगरपालिका संशोधन विधेयक का समर्थन
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायक कोठारी ने महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक, 2025 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 का भी समर्थन किया। उन्होंने “महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक, 2025” का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि प्रदेश के खिलाड़ियों के भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि इससे खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय कोचिंग, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन जैसे विषयों में बेहतर अवसर मिलेंगे। विधायक कोठारी ने ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए ‘ग्रामीण खेल विकास सेल’, पदक विजेता खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर तथा पैरा-एथलीटों के साथ ही दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष सुविधाएं शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय देश के लिए एक आदर्श खेल संस्थान बनेगा। उद्योग मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने विधायक कोठारी की बात सराहना करते हुए कहा कि "उन्होंने खेल को गहराई से समझा है।"
लोकतांत्रिक सुधार और समावेशी विकास पर जोर
कोठारी ने राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन लोकतंत्र को अधिक व्यापक, समावेशी और मानवीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकने वाली धारा हटाकर हजारों योग्य लोगों के लिए लोकतंत्र के द्वार खोले गए हैं। साथ ही “खतरनाक रोग” की परिभाषा से कुष्ठ शब्द हटाना मानव गरिमा और समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप है। विधायक कोठारी ने कानून के स्पष्ट क्रियान्वयन और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार परिभाषा अद्यतन करने के सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि खेल विश्वविद्यालय प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और करियर के नए अवसर प्रदान करेगा, जबकि नगरपालिका संशोधन विधेयक लोकतंत्र को अधिक व्यापक और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। विधायक कोठारी ने कहा कि इन सभी मुद्दों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग की भावनाओं का सम्मान करना, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

Pratahkal Bureau
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