भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा की फिजां इन दिनों राममय हो गई है, जहाँ तूलिका के रंगों और कल्पनाओं के संगम से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का संपूर्ण जीवन दर्शन जीवंत हो उठा है। स्थानीय आकृति कला संस्थान और जवाहर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'अरिंदम' कला शिविर ने कला जगत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। 16 से 21 जनवरी तक चलने वाली इस विशेष पेंटिंग वर्कशॉप में न केवल भक्ति का अनूठा प्रदर्शन हो रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को कला के माध्यम से सनातन संस्कृति के गौरवमयी मूल्यों से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास भी किया जा रहा है। संस्थान के सचिव कैलाश पालिया के अनुसार, इस भव्य आयोजन का उद्देश्य श्री राम के संघर्षों, उनके आदर्शों और उनके लोक-कल्याणकारी स्वरूप को आधुनिक कैनवास पर उतारकर युवा मानस को प्रेरित करना है।

इस कार्यशाला की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ शहर के दिग्गज हस्ताक्षर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। वरिष्ठ कलाकार गोवर्धन सिंह पंवार ने 'लक्ष्मण रेखा' के माध्यम से मर्यादा की गहराई को उकेरा है, तो वहीं मंजू मिश्रा और हेमंता मीना के चित्रों में 'राम राज्य' की सुखद परिकल्पना दिखाई देती है। इकबाल हुसैन ने अपनी तूलिका से 'श्री राम' के अलौकिक स्वरूप को साकार किया है, जबकि सत्यनारायण सोनी के रंगों में 'केवट प्रेम' की भावुकता स्पष्ट झलकती है। प्रकृति और भक्ति के सामंजस्य को गोपाल दास वैष्णव ने 'रामसेतु में गिलहरी की भूमिका' के जरिए बखूबी दर्शाया है। स्वयं सचिव कैलाश पालिया ने 'रामलला' के बाल स्वरूप को कैनवास पर उतारा है, वहीं गीताजंलि वर्मा और कपिल खन्ना ने 'अमूर्त शैली में रामायण' को प्रस्तुत कर आधुनिक कला का परिचय दिया है।

परंपरागत कला को सहेजते हुए फड़ चित्रकार लोकेश जोशी ने 'अशोक वाटिका एवं लंका दहन' के दृश्यों को जीवंत किया है। सौरभ सोनी द्वारा रचित 'सीता स्वयंवर' का दृश्य और सत्येश एवं मुकेश विश्वकर्मा द्वारा यथार्थवादी शैली में निर्मित 'प्रभु श्रीराम' की प्रतिमा दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। ज्योति पारीक ने 'रामेश्वरम् स्थापना' के ऐतिहासिक क्षण को चित्रित किया है। युवाओं में भी इस कार्यशाला को लेकर अपूर्व उत्साह है, जहाँ अन्नु प्रजापत ने मधुबनी शैली में 'पुष्पक विमान' और अनुष्का पाराशर ने कलमकारी व फड़ शैली के अनूठे फ्यूजन से 'हनुमान' की आकृति बनाई है। झलकरानी ने 'राम का राज्याभिषेक', शांतिलाल गाडरी ने 'हनुमान सीता मिलन' और सुमित गुर्जर ने फड़ शैली में पूरी 'रामायण' को ही चित्रित कर दिया है। लोक कला के रंगों में रंगे खुशी कंवर और सुरभि पारीक के 'राम राज्याभिषेक' व 'मां शबरी' के चित्र भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। सबसे विस्मयकारी दृश्य 10 वर्षीय नन्हे कलाकार भूवी केशवानी के 'मतवाले हनुमंत' और धनिष्ठा चपलोत के 'केवट' प्रसंग में देखने को मिलता है, जो कला के उज्ज्वल भविष्य का संकेत दे रहे हैं।

यह सृजन यात्रा केवल कार्यशाला तक सीमित नहीं रहेगी। इन सभी अनमोल कृतियों को आगामी 22 जनवरी से 26 जनवरी तक वकील कॉलोनी स्थित आकृति आर्ट गैलरी में सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। इस प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन भव्य समारोह के साथ होगा, जो भीलवाड़ा के कला प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होगा। 'अरिंदम' कार्यशाला ने यह सिद्ध कर दिया है कि कला और आध्यात्म का मिलन समाज को नई दिशा और वैचारिक ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है।

Pratahkal Bureau

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