माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चल रहे ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार को आयोजित दैनिक सत्संग में अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने भजन, भक्ति और संकीर्तन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजन करना मां सिखाती है और भजन करना महात्मा सिखाते हैं। भोजन शरीर के लिए, जबकि भजन आत्मा के कल्याण के लिए जरूरी है।

आचार्यश्री ने कहा कि जब व्यक्ति भोजन करना सीख जाता है तो भजन करना क्यों नहीं सीख सकता। भजन हमेशा प्रसन्न रहकर करना चाहिए। भगवान की भक्ति करने से सब कुछ प्राप्त हो जाएगा। भक्ति से मिलने वाला सुख संसार में किसी अन्य साधन से प्राप्त नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि भजन-संकीर्तन में चित्त की शुद्धि करने की शक्ति है। भजन-कीर्तन से संसार के सुखों से विरक्ति होने लगती है और आत्मीय आनंद की अनुभूति होती है। संकीर्तन ऐसा राम रस है, जिसे पीने के बाद संसार के अन्य किसी रस को पाने की अभिलाषा नहीं रहती। भक्त केवल भगवान के नाम का राम रस चाहता है और इसे पीने के बाद संसार का अन्य कोई रस नहीं चाहिए।






आचार्यश्री ने कहा कि कीर्तन कर मीरा माधव में समा गईं और मौन रहकर महावीर ने अरिहन्त को प्राप्त कर लिया। महावीर का अन्तर्कीर्तन था और मीरा का बाह्य कीर्तन। युग बीत गए, लेकिन मीरा की कीर्तन भक्ति संसार में अमर हो गई। महान वही बनता है जो संसार में रहकर भी साधक जैसा जीवन जीता है और साधना के शिखर को छूता है।

उन्होंने कहा कि सद्गुरू की कृपा से जीवन की सारी खुशियां मिलती हैं। भक्ति और भजन से भागना एक तरह से भगवान को धोखा देना है।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जिसकी मानसिकता स्वस्थ नहीं है, आचार, विचार, क्रिया, व्यवहार और भाषा की शुद्धि नहीं है, जिसका अतीत शुद्ध नहीं और भविष्य शुद्ध नहीं, वह भक्त नहीं हो सकता। ऐसे व्यक्ति को संसार से मुक्ति कैसे मिल सकती है। उन्होंने कहा कि संसार जानता है कि कोई व्यक्ति क्यों बोल रहा है और किसलिए बोल रहा है। उसकी अन्तरात्मा एवं परमात्मा से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

चातुर्मास के दौरान दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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