भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चल रहे ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत रविवार को दैनिक सत्संग में अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में सेवा, परोपकार, सत्संग और राम नाम के महत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हृदय पवित्र नहीं होगा, तब तक मनुष्य परमात्मा का कृपापात्र नहीं बन सकता।

आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि हाथों की शोभा परोपकार और सेवा में है। भूखे को रोटी खिलाने और प्यासे को पानी पिलाने में हाथों की सार्थकता है। धर्मस्थान और सत्संग में जाने से पैर पवित्र होते हैं, राम का नाम लेने से जुबान पवित्र होती है और हृदय में राम एवं गुरु के प्रति निष्ठा होने पर हृदय पवित्र बनता है। उन्होंने कहा कि जुबान पर कुछ और और हृदय में कुछ और हो तो वह पवित्र नहीं हो सकता। जिसका हृदय पवित्र नहीं है, वह सात जन्म में भी परमात्मा का कृपापात्र नहीं बन सकता।

उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से शरीर की स्वच्छता होती है, लेकिन पवित्रता नहीं, जबकि राम नाम की गंगा से शरीर और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं। नाम के प्रभाव में ऐसी सामर्थ्य है। इंसान फालतू बातें करने से नहीं थकता, लेकिन भगवान का भजन करना हो तो दिन में तारे नजर आने लगते हैं। भजन करने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता। सत्संग और भजन अमृत के समान हैं। बुद्धिमान व्यक्ति सत्संग कर समय का सदुपयोग करता है।



आचार्यश्री ने कहा कि जब तक हार्ट फेल नहीं हो, चुगली करना छोड़ भगवान का नाम लेकर जीवन को धन्य बना लेना चाहिए। अच्छा नहीं बोल सकते तो बुरा भी नहीं बोलना चाहिए। नहीं बोलना अच्छा है, लेकिन खराब और सत्यरहित बोलना बुरा है। उन्होंने कहा कि हम राम नाम का रस पीना चाहते हैं, लेकिन यह जुबान संसार के निंदा रस का जहर पीना चाहती है, इसीलिए इसे पापिनी कहते हैं। जुबान पर विष भी है और अमृत भी। यह इंसान को तय करना है कि वह अपनी जुबान का कैसा उपयोग करना चाहता है। जुबान का उपयोग लोभ की चर्चा में नहीं, भगवान का नाम लेने में होना चाहिए।

आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि भजन करने का श्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 से 6 बजे तक का होता है। इस समय भजन, ध्यान और स्नान सर्वोत्तम कहलाते हैं। उन्होंने बताया कि इस समय का स्नान देव स्नान, सुबह 6 से 9 बजे तक का स्नान मनुष्य स्नान और इसके बाद का स्नान राक्षस स्नान कहलाता है। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में राम नाम लेने से जीवन धन्य हो जाता है। जुबान से राम का नाम निकलता रहे तो जीवन का कल्याण होता है। रसना का अर्थ यही है कि जुबान पर जगत का कोई रस नहीं हो, केवल राम नाम का रस हो। राम-राम करती जुबान रसना बन जाती है।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

रामद्वारा धाम में प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेदपाठी विद्वान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे।

श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह के दौरान प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक और दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा होगी। सुबह 10.30 से 11.30 बजे तक और शाम 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा, जबकि श्रीमद्भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से माणिक्यनगर रामद्वारा में चातुर्मास के दौरान सत्संग, भजन और धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहेगा।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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