मांडल तालाब की सुरक्षा हेतु किसानों ने उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
मानसून पूर्व टूटी फेंस वॉल की मरम्मत और केमिकलयुक्त प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

भीलवाड़ा के मांडल में तालाब की सुरक्षा और मरम्मत की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जगदीश चौधरी, विकास सुवालका एवं अन्य ग्रामीण।
मांडल क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाले मांडल तालाब की बदहाली और सुरक्षा को लेकर स्थानीय किसानों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने गहरा रोष व्यक्त किया है। मानसून की दस्तक से पूर्व तालाब की जर्जर स्थिति और प्रदूषण की गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्रवासियों ने मांडल उपखंड अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो न केवल कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र में गंभीर जनहानि और स्वास्थ्य संकट भी पैदा हो सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया कि मांडल तालाब की भराव क्षमता लगभग 14 फीट ऊंचाई और 500 एमसीएफ की है, जिसके पानी से क्षेत्र की लगभग 3000 बीघा भूमि की सिंचाई की जाती है। कृषि और पशुपालन का मुख्य आधार होने के बावजूद इस महत्वपूर्ण जल स्रोत की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि 06 सितंबर 2025 को तालाब के अंदर की फेंस वॉल करीब 50 फीट की लंबाई में टूटकर तालाब में समा गई थी, जिसका पुनर्निर्माण आज तक अधर में लटका है। वर्तमान में तालाब में 9 फीट पानी मौजूद है और मानसून आने में मात्र एक माह का समय शेष है। ऐसे में टूटी दीवार के कारण बारिश के दौरान तालाब की पाल को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है, जिससे किसी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
तालाब की संरचना के साथ-साथ जल प्रदूषण का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ब्यावर रोड़-गोगावला क्षेत्र की ओर से आने वाले प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में रीहड़ी डम्पर प्लांट संचालित हो रहा है, जिससे निकलने वाला जहरीला केमिकलयुक्त पानी सीधे तालाब में मिल रहा है। चूंकि इस तालाब का पानी ग्रामीणों, मवेशियों और वन्यजीवों द्वारा उपयोग किया जाता है, इसलिए प्रदूषित जल के कारण गंभीर बीमारियां फैलने का भय बना हुआ है। इस संबंध में पूर्व में भी विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं होने से आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने उक्त डम्पर प्लांट को तत्काल प्रभाव से बंद करने की पुरजोर मांग की है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग NH-158 के निर्माण के बाद उत्पन्न हुई तकनीकी समस्या की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया। सड़क की ऊंचाई बढ़ने से तालाब के पीछे की फेंसिंग अपेक्षाकृत नीची रह गई है, जिसके कारण आवारा पशु सुगमता से तालाब की पाल पर चढ़कर वहां रोपे गए पौधों और वृक्षों को नष्ट कर रहे हैं। किसानों ने सुरक्षा की दृष्टि से पीछे की ओर भी मजबूत फेंसिंग करवाने और मुख्य मार्ग के प्रवेश द्वार पर बड़ा कटर या गेट लगाने का सुझाव दिया है ताकि पशुओं के प्रवेश पर रोक लग सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मांडल के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जगदीश चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष विकास सुवालका, जिला अभाव अभियोग प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष सुरेशचंद्र पारीक, लक्ष्मीलाल बिरला, ओम रूमवाल, अशोक बिरला, मोटू चौधरी, सुरेश जाट, मुरली शर्मा, अनवर, सत्यानारायण मांडोवरा सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए मानसून पूर्व सभी आवश्यक कार्य पूर्ण किए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि, जलभराव या पर्यावरणीय क्षति को रोका जा सके।

Pratahkal Bureau
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