भीलवाड़ा: सामाजिक संगठनों में चुनाव बनाम योग्यता आधारित नियुक्तियों पर विमर्श
ममता मोदानी ने सामाजिक संगठनों में गुटबाजी रोकने के लिए चुनाव के स्थान पर योग्यता आधारित पारदर्शी मनोनयन और समाज सेवकों की भागीदारी पर जोर दिया।

भीलवाड़ा के गीता भवन में अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब द्वारा आयोजित 'चर्चा चाय पर' कार्यक्रम के दौरान वैचारिक विमर्श करतीं ममता मोदानी, अनिता सोडाणी और अन्य पदाधिकारी।
भीलवाड़ा। सामाजिक संगठनों की सुदृढ़ता और एकजुटता के लिए चुनाव के बजाय योग्यता आधारित नियुक्तियां अधिक प्रासंगिक हैं, क्योंकि चुनाव से न केवल मतभेद बल्कि मनभेद की स्थितियां भी उत्पन्न होती हैं। यह विचार अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ममता मोदानी ने व्यक्त किए। वे अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत द्वारा भीलवाड़ा स्थित राष्ट्रीय कार्यालय 'गीता भवन' सभागार में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की वैचारिक वार्ता में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं। "सामाजिक संगठनों में चुनाव होने चाहिए या तन-मन-धन को संतुलित करते हुए योग्यता के आधार पर नियुक्तियां होनी चाहिए" विषय पर केंद्रित इस चर्चा में श्रीमती मोदानी ने जोर देकर कहा कि चुनाव मानवीय स्वभाव के अनुरूप आपसी तनाव पैदा करते हैं, जिससे रिश्तों में दरार आती है और संगठन में सहयोग के स्थान पर गुटबाजी व टांग खिंचाई की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पदाधिकारियों का मनोनयन एक सकारात्मक संदेश देता है।
वैचारिक वार्ता 'चर्चा चाय पर' की अध्यक्षता करते हुए क्लब की राष्ट्रीय महासचिव अनिता सोडाणी ने क्लब के 133 जिलों से प्राप्त फीडबैक को साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अति महत्वाकांक्षी व्यक्तियों को सामाजिक संगठनों से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कार्य स्वरूप में बुनियादी अंतर होता है। राजनीतिक दलों में 'कार्यकर्ता' होते हैं, जबकि सामाजिक संगठनों में 'समाज सेवक' होते हैं। सोडाणी ने पदाधिकारियों के मनोनयन के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था का सुझाव देते हुए कहा कि नियुक्तियां दो स्पष्ट वर्गों में होनी चाहिए, जिससे यह परिलक्षित हो कि अमुक पदाधिकारियों ने समाज को आर्थिक सहयोग (धन) दिया है और अमुक पदाधिकारी समाज सेवा के लिए अपना बहुमूल्य समय (तन-मन) समर्पित कर रहे हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुमन सोनी ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वास्तविक सेवा भाव रखने वाले व्यक्ति को पद का लालच नहीं होता, किंतु संगठनों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मनोनीत किए जाने वाले पदाधिकारी पूर्णतः निष्कलंक हों। इस गरिमामय और बौद्धिक विमर्श का प्रभावी संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. चेतना जागेटिया ने किया। आयोजन में विशिष्ट अतिथि के रूप में कान्ता मेलाणा, डॉ. राखी राठी, एडवोकेट नीलम दरगड़ और इन्दिरा सोमानी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर विषय की गंभीरता पर बल दिया। यह वैचारिक विमर्श न केवल माहेश्वरी समाज बल्कि समस्त सामाजिक संगठनों के भविष्य की कार्यप्रणाली को एक नई दिशा प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ है।

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