भीलवाड़ा, 22 मार्च 2026। अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत की भीलवाड़ा जिला शाखा द्वारा आयोजित 'चर्चा चाय पर' कार्यक्रम में समाज की वर्तमान स्थिति को लेकर एक अत्यंत गंभीर और चेतावनीपूर्ण विमर्श सामने आया है। "परिवार रहेगा तो समाज रहेगा" विषय पर केंद्रित इस चर्चा में यह कड़वा सच उजागर किया गया कि माहेश्वरी समाज वर्तमान में कुंवारेपन के एक बड़े विस्फोट के कगार पर आ खड़ा हुआ है। वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब वक्त आ गया है जब कड़वी सच्चाई को मीठे शब्दों में लपेटकर कहना बंद करना होगा, क्योंकि जिस आर्थिक आजादी की आज जय-जयकार हो रही है, वही आजादी धीरे-धीरे हमारे परिवार, रिश्तों और सामाजिक संतुलन को निगल रही है।

कार्यक्रम में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आर्थिक आजादी की अंधी दौड़ ने समाज को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ अंतरराष्ट्रीय सर्वे भविष्य की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। सर्वे के मुताबिक आने वाले कुछ वर्षों में 45 प्रतिशत तक युवक-युवतियां विवाह से पूरी तरह दूरी बना सकते हैं। जिसे पहली नजर में प्रगति समझा जा रहा है, वह वास्तव में भविष्य के लिए एक घातक 'टाइम-बम' के समान है। चर्चा में उभरकर आया कि आज की बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर, सीए और सफल उद्यमी बनकर शानदार उपलब्धियां हासिल कर रही हैं, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि क्या केवल करियर ही पूरा जीवन है? पैसा कभी साथी नहीं बनता और न ही उच्च पद वृद्धावस्था में संबल प्रदान करते हैं। मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे के अकेलेपन को दूर नहीं कर सकते, फिर भी समाज इस सच्चाई को नजरअंदाज कर केवल आर्थिक दौड़ का हिस्सा बना हुआ है।





वर्तमान में परिवार ढह रहे हैं, कुंवारे लड़कों और अविवाहित युवतियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या का ग्राफ गिर रहा है। इस सामाजिक विखंडन के बीच अकेलापन दूर करने वाले उद्योग जैसे काउंसलर, थेरेपी और डिप्रेशन की गोलियों का कारोबार फल-फूल रहा है। इसके बावजूद समाज के कर्णधार इसे 'आधुनिक युग' कहकर मौन स्वीकृति दे रहे हैं, जबकि वास्तव में यह आधुनिकता नहीं बल्कि परिवार और मानवीय संबंधों की धीमी मौत है। चर्चा में यह चिंताजनक स्थिति भी रेखांकित की गई कि जब माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, तो युवा 'अभी नहीं' कहकर टाल देते हैं, जो धीरे-धीरे 'कभी नहीं' में बदल जाता है। विलंब से होने वाले विवाहों के कारण अंततः हार्मोनल इश्यू, कंसीव न होना और मानसिक तनाव जैसी मेडिकल रिपोर्ट सामने आती हैं, जो आगे चलकर अंतर्जातीय विवाहों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

सामाजिक संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि सच्चाई बोलने से 'आधुनिकता-विरोधी' कहलाने के डर ने संगठनों को मौन कर दिया है। यदि 21 से 25 वर्ष की उपयुक्त आयु में विवाह की परंपरा पुनः सुदृढ़ नहीं हुई, तो माहेश्वरी समाज में कुंवारेपन की स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। अंत में यह निष्कर्ष दिया गया कि वह प्रगति व्यर्थ है जो व्यक्ति को अकेला कर दे; यदि भविष्य कुंवारा और भावहीन है, तो यह समाज के लिए गर्व की नहीं बल्कि खतरे की घंटी है। अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती अनिता डॉ. अशोक सोडाणी ने जानकारी दी कि इन गंभीर विचारों और निष्कर्षों को क्लब की सभी 133 जिला व नगर शाखाओं सहित माहेश्वरी समाज के समस्त नीति-निर्धारक प्रमुख संगठनों को आवश्यक चिंतन और ठोस निर्णय हेतु भेजा जा रहा है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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