भीलवाड़ा। राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इन दिनों अध्यात्म के एक ऐसे अनूठे रंग में रंगी है, जिसकी गूंज न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में सुनाई दे रही है। शहर के ऐतिहासिक पेच के बालाजी मंदिर, बालाजी मार्केट में आयोजित 14 दिवसीय 'सवा लाख अखंड हनुमान चालीसा पठन' अनुष्ठान ने श्रद्धा और अटूट विश्वास का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 'कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होइ तात तुम पाही' के पावन मंत्र को आत्मसात करते हुए, सर्वजन कल्याण और श्री हनुमत कृपा की प्राप्ति के संकल्प के साथ यह आयोजन 3 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 16 जनवरी 2026 तक अनवरत जारी है।

इस भव्य अनुष्ठान की कमान बनारस के प्रकांड विद्वान आचार्य पंडित सच्चिदानंद झा के हाथों में है, जिनके निर्देशन में 108 विद्वान पंडितों की टोली इस आध्यात्मिक यज्ञ को पूर्ण कर रही है। व्यवस्था की विशिष्टता ऐसी है कि 81 पंडित प्रतिदिन सामूहिक रूप से प्रातः 9:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक 121 पाठ संपन्न कर रहे हैं। श्रद्धा की पराकाष्ठा यह है कि प्रत्येक पाठ की पूर्णता पर हनुमान जी महाराज को नैवेद्य के रूप में एक फल अर्पित किया जा रहा है, जो न केवल समर्पण का प्रतीक है बल्कि पाठ की संख्या गणना का एक सटीक माध्यम भी बना हुआ है। शेष समय में 27 पंडितों द्वारा बारी-बारी से संगीतमय पाठ किया जा रहा है, जिसमें शहर की ख्यातनाम भजन मंडलियां और मंदिर के श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर होकर सहभागिता कर रहे हैं।

यह भीलवाड़ा के इतिहास में दूसरी बार है जब ऐसा विराट आयोजन हो रहा है। इससे पूर्व, अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर निर्माण और नूतन रामलला की मूर्ति प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर 7 जनवरी 2024 से 25 जनवरी 2024 तक 19 दिवसीय अनुष्ठान आयोजित किया गया था, ताकि संपूर्ण कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके। उल्लेखनीय है कि हनुमान चालीसा का सर्वप्रथम वाचन 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा किया गया था, जिसकी सत्यता की पुष्टि स्वयं भगवान शंकर और माता पार्वती ने 'सिद्धि साखी गौरी सा' के माध्यम से की थी।

इस पुनीत कार्य के पीछे आयोजक जानकी लाल, करुणा देवी, राहुल, श्वेता एवं समस्त भूरालाल सुवालका परिवार की अटूट श्रद्धा और समर्पण है। आयोजन की सफलता में बजरंग मंदिर ट्रस्ट के समस्त भक्तगण और मंदिर के महंत पंडित आशुतोष शर्मा दिन-रात जुटे हुए हैं। इस अद्वितीय और अनूठे भक्ति आयोजन की भव्यता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल कुमार मानसिंहका इसे 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराने हेतु प्रयासरत हैं। भीलवाड़ा में हो रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का एक ऐसा जीवंत उदाहरण है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

Pratahkal Bureau

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