भीलवाड़ा। महिला शिक्षा की अलख जगाने वाली और सामाजिक चेतना की प्रणेता, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती शनिवार को वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। समाज सुधार के क्षेत्र में मील का पत्थर मानी जाने वाली माता सावित्रीबाई फुले का जन्मदिवस 3 जनवरी को उनके आदर्शों और संघर्षों को नमन करने के लिए समर्पित होगा।

इस गरिमामय आयोजन की जानकारी देते हुए फुले सेवा संस्थान के अध्यक्ष गोपाललाल माली ने बताया कि शनिवार प्रातः 09:30 बजे भीलवाड़ा के देवरिया बालाजी मंदिर के समीप स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले मूर्ति परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सावित्रीबाई फुले के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया जाएगा, जहाँ फुले के अनुयायी और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्ध जन उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देंगे।

महज एक औपचारिक पुष्पांजलि कार्यक्रम तक सीमित न रहकर, इस बार संस्थान ने बौद्धिक चर्चा के माध्यम से सावित्रीबाई फुले के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया है। पुष्पांजलि के पश्चात "आज के दौर में कितनी प्रासंगिक है सावित्रीबाई फुले" विषय पर एक विशेष व्याख्यान माला आयोजित की जाएगी। इस व्याख्यान के माध्यम से वक्ता वर्तमान समाज में महिला शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान की आधुनिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालेंगे।

आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। फुले सेवा संस्थान के अध्यक्ष गोपाललाल माली ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर संस्था के सभी पदाधिकारी, सक्रिय सदस्य और महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले के अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम न केवल एक महापुरुष का स्मरण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके द्वारा दिखाए गए शिक्षा और समानता के मार्ग पर चलने की एक प्रेरणा भी है।

Pratahkal Bureau

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