भीलवाड़ा में खाकी का खौफ: साल भर में बरामद किए 1004 मोबाइल, चोरों के गिरोह में मची खलबली
भीलवाड़ा पुलिस ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 1004 चोरी हुए मोबाइल बरामद कर मालिकों को सौंपे। कांस्टेबल छोटू रेबारी के तकनीकी नेतृत्व और CEIR पोर्टल की मदद से बरामदगी में 128% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल चोरों में खलबली मचाने वाली इस रिपोर्ट में जानें कैसे पुलिस और जनता की जागरूकता ने अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में पुलिस ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए तकनीकी दक्षता और जन-सहयोग की एक नई मिसाल पेश की है। वर्ष 2025 भीलवाड़ा पुलिस के लिए सफलताओं का साल रहा, जहां पुलिस ने चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन की बरामदगी में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम किया है। अत्याधुनिक 'केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर' (CEIR) पोर्टल के प्रभावी इस्तेमाल से पुलिस ने बीते एक वर्ष में कुल 1004 मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है। पुलिस की इस सक्रियता ने जिले में सक्रिय मोबाइल चोरों और झपट्टा मार गिरोहों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
आंकड़ों की जुबानी देखें तो वर्ष 2024 की तुलना में 2025 के परिणाम चौंकाने वाले और पुलिस की बढ़ती ताकत का अहसास कराते हैं। जहां साल 2024 में 963 शिकायतों पर मात्र 440 मोबाइल बरामद हो सके थे, वहीं साल 2025 में शिकायतों का ग्राफ बढ़कर 1624 तक जा पहुंचा। चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद भीलवाड़ा पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली को धार दी और बरामदगी के आंकड़े को 1004 तक पहुंचा दिया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 128 प्रतिशत की रिकॉर्डतोड़ वृद्धि है, जो पुलिस की तकनीकी टीम की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस सफलता की पटकथा में तकनीकी समन्वय और नोडल कार्मिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जिले में CEIR पोर्टल के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे नोडल कार्मिक कांस्टेबल छोटू रेबारी (655) की सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई ने इस अभियान को नई गति प्रदान की। प्राप्त कुल शिकायतों में से 947 पुलिस के माध्यम से जबकि 677 जागरूक नागरिकों द्वारा स्वयं ऑनलाइन दर्ज कराई गई थीं। कांस्टेबल छोटू रेबारी और उनकी टीम ने इन शिकायतों पर तकनीकी जाल बिछाया, जिससे न केवल मोबाइल फोन ट्रैक हुए बल्कि उन्हें ब्लॉक कर अपराधियों के लिए बेअसर भी कर दिया गया।
भीलवाड़ा पुलिस की इस उपलब्धि के पीछे जनता और खाकी की अटूट जुगलबंदी भी एक बड़ा कारक रही है। पुलिस द्वारा समय-समय पर चलाए गए साइबर जागरूकता अभियानों का ही परिणाम है कि आमजन अब मोबाइल चोरी या गुम होने पर चुप बैठने के बजाय 'संचार साथी' ऐप और CEIR पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि मोबाइल चोरी अब अपराधियों के लिए लाभ का सौदा नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधा जेल जाने का मार्ग प्रशस्त करता है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बिना देरी किए डिजिटल माध्यमों से शिकायत दर्ज कराएं ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

Pratahkal Bureau
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