हिंदुस्तान जिंक ने 23 अरब लीटर पानी किया रीसायकल, 49% रीसाइक्लिंग दर और 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव स्थिति बरकरार
हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 23 अरब लीटर पानी रीसायकल कर 49% रीसाइक्लिंग दर और 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव स्थिति कायम रखी। जानिए पूरी पहल।

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा कंपनी के संयंत्र क्षेत्र में सुरक्षा हेलमेट पहने खड़े हैं।
विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और चांदी के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 23 अरब लीटर पानी रीसायकल किया है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी की वार्षिक पानी रीसाइक्लिंग दर बढ़कर 49 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में कंपनी के कुल जल उपयोग में भी कमी दर्ज की गई, जबकि उसने अपनी 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव स्थिति भी बरकरार रखी। यह उपलब्धि जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और ताजे पानी पर निर्भरता कम करने की दिशा में कंपनी के लगातार प्रयासों को दर्शाती है।
कंपनी के अनुसार यह सुधार उसकी दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम है, जिसके तहत एडवांस्ड वॉटर रिकवरी टेक्नोलॉजी, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तथा ट्रीटेड वॉटर के अधिकतम उपयोग को संचालन का हिस्सा बनाया गया है। इन उपायों से शुद्ध जल की खपत में कमी आई है और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हुआ है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “भविष्य का खनन केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से तय होगा। भारत के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। हिंदुस्तान जिंक में हम अपनी सभी वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं में जल प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि विकास और शुद्ध जल पर निर्भरता को अलग किया जा सके। हमारा उद्देश्य संचालन में उत्कृष्टता के साथ-साथ समुदायों, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण करना है।”
कंपनी अपने विभिन्न संयंत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, रिवर्स ऑस्मोसिस यूनिट, मल्टी-इफेक्ट इवैपोरेटर और मैकेनिकल वेपर रिकम्प्रेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पानी के रीसाइकल को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही फिल्टर्ड टेलिंग्स तकनीक का विस्तार किया गया है, जिसके माध्यम से टेलिंग्स से 80 प्रतिशत से अधिक पानी को पुनः प्राप्त किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्थान के राजपुरा-दरीबा में दूसरे फिल्टर्ड टेलिंग्स प्लांट की शुरुआत से कंपनी की रीसाइकल क्षमता को और मजबूती मिली है।
उदयपुर में राजस्थान सरकार के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विकसित कंपनी का 60 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी शहर के अपशिष्ट जल को औद्योगिक उपयोग योग्य पानी में परिवर्तित कर रहा है। इससे एक ओर कंपनी की जल आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है, वहीं दूसरी ओर शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन को भी मजबूती मिल रही है।
संचालन क्षेत्रों के अलावा हिंदुस्तान जिंक आसपास के समुदायों में जल सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी लगातार कार्य कर रही है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने जल-संकट वाले क्षेत्रों में 280 से अधिक जल संरक्षण परियोजनाएं लागू की हैं। इनमें वर्षा जल संचयन, तालाबों का पुनर्जीवन, चेक डैम निर्माण और भूजल पुनर्भरण जैसी पहल शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप समुदायों के लिए 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा और जल उपलब्धता को बढ़ावा मिला है।
हिंदुस्तान जिंक की ये पहलें उसके ईएसजी लक्ष्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6, स्वच्छ जल और स्वच्छता को भी समर्थन देती हैं। वेदांता समूह के सतत और समुदाय-केंद्रित विकास के विजन के अनुरूप कंपनी पर्यावरण और समाज दोनों के लिए सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
कंपनी की जिम्मेदार और सस्टेनेबल खनन के प्रति प्रतिबद्धता को वर्ष 2025 में और मजबूती मिली, जब हिंदुस्तान जिंक इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स में शामिल होने वाली भारत की पहली धातु एवं खनन कंपनी बनी। यह उपलब्धि जिम्मेदार और सतत खनन के वैश्विक मानकों के प्रति कंपनी के समर्पण को रेखांकित करती है।

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