भीलवाड़ा के हरिशेवा आश्रम में पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत कथा शुरू
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम महाराज के सानिध्य में पूर्णिमा उद्यापन संपन्न, जबलपुर के स्वामी अशोकानंद और काशी के स्वामी निर्मल दास सुनाएंगे कथा।

भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को श्री सत्यनारायण कथा सुनाकर उसका आध्यात्मिक महत्व बताते पंडित गौरी शंकर शास्त्री।
सनातन सेवा समिति, हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के पावन सानिध्य में भीलवाड़ा शहर धार्मिकता के चरम उत्कर्ष का साक्षी बन रहा है। आश्रम में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित व्यापक धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला निरंतर जारी है, जिसके अंतर्गत पूरे माह संचालित होने वाले विविध आध्यात्मिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में आगे कई अत्यंत महत्वपूर्ण और भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी श्रृंखला में श्रद्धा, आस्था और अगाध भक्तिभाव के साथ सामूहिक पूर्णिमा उद्यापन का बृहद आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
इस पावन अवसर पर आयोजित श्री सत्यनारायण कथा के दौरान उपस्थित विशाल श्रद्धालु समुदाय को संबोधित करते हुए प्रख्यात विद्वान पंडित गौरी शंकर शास्त्री ने पुरुषोत्तम मास के अलौकिक महत्व पर सनातनी प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक परिवर्तनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संसार निरंतर परिवर्तनशील है और यहां हर क्षण बदलाव होता रहता है। उन्होंने जीवन दर्शन को स्पष्ट करते हुए आह्वान किया कि मनुष्य को अपनी अपूर्णता को छोड़कर पूर्णता की ओर अग्रसर होना चाहिए, और इस परम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भगवान का निरंतर स्मरण ही सबसे श्रेष्ठ, सुगम और एकमात्र मार्ग है।
पंडित गौरी शंकर शास्त्री ने पुरुषोत्तम मास की दिव्यता की व्याख्या करते हुए दृढ़तापूर्वक कहा कि पुरुषोत्तम मास अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है, जिसमें मानव मात्र द्वारा किए गए जप, तप, दान, पूजा-पाठ एवं सत्संग का विशेष और अक्षय फल प्राप्त होता है। ईश्वर नाम की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर का नाम लेने मात्र से मानव जीवन सफल हो जाता है तथा व्यक्ति के अंतःकरण में तीव्र आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। शास्त्री ने समस्त श्रद्धालुओं से भावपूर्ण आह्वान किया कि वे इस अत्यंत दुर्लभ पुरुषोत्तम मास में अपना अधिक से अधिक समय भगवान की अनन्य भक्ति, कथा श्रवण और सत्कर्मों में लगाएं, जिससे सांसारिक जीवन में सुख, शांति और परम आत्मिक उन्नति प्राप्त हो सके। इस आध्यात्मिक उपदेश के उपरांत श्रद्धालुओं ने पूर्ण विधि-विधानपूर्वक भगवान विष्णु की वैदिक पूजा-अर्चना की तथा पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत किए गए समस्त व्रत, जप, तप, पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का सामूहिक उद्यापन किया, जिसमें बड़ी संख्या में संमिलित होकर धर्मप्रेमी जनता ने पुण्य लाभ अर्जित किया।
आश्रम के पूज्य संत मायाराम ने आगामी आयोजनों की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक प्रवचनों की इस भव्य श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 1 जून से 7 जून तक दिव्य श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस कथा का वाचन एवं अमृतमयी प्रवचन जबलपुर के सुप्रसिद्ध पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज के श्रीमुख से संपन्न होगा, जिसके माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक एवं दिव्य लीलाओं, अनन्य भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य का शाश्वत संदेश श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। इसके तुरंत पश्चात, आगामी 8 जून से 14 जून तक श्रीशिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन सुनिश्चित किया गया है, जिसका रसपान काशी के प्रकांड विद्वान संत डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज के मुखारविंद से कराया जाएगा। इस शिव महापुराण कथा में देवाधिदेव भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी असीम महिमा, अनन्य शिव-भक्ति तथा सनातन संस्कृति के विविध गूढ़ आयामों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
महोत्सव की पूर्णता के संबंध में आश्रम के पूज्य संत गोविन्दराम ने बताया कि इस पावन पुरुषोत्तम मास के समापन के ऐतिहासिक अवसर पर 15 जून को एक विशाल एवं भव्य संत समागम का आयोजन किया जाएगा। इस समापन दिवस पर विष्णु यज्ञ की पूर्णाहुति, समस्त मास-पर्यंत चले पाठ-परायणों की पूर्णाहुति, महा गंगा आरती एवं रामधुन विश्राम सहित विभिन्न उच्च धार्मिक कार्यक्रम शास्त्रीय मर्यादा के साथ सम्पन्न होंगे, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे प्रतिष्ठित संत-महात्माओं का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा और वे श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति एवं उत्कृष्ट आध्यात्मिक जीवन के प्रति प्रेरित करेंगे। संत गोविन्दराम ने गरिमापूर्ण शब्दों में कहा कि पुरुषोत्तम मास के दौरान हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की जो अभूतपूर्व आध्यात्मिक धारा प्रवाहित हो रही है, वह समस्त श्रद्धालुओं के जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने भीलवाड़ा नगर एवं इसके आसपास के समस्त ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से भावभीना आग्रह किया कि वे इस श्रीमद्भागवत कथा, श्रीशिव महापुराण कथा तथा भव्य समापन समारोह में अधिकाधिक संख्या में सपरिवार उपस्थित होकर धर्मगंगा की इस पावन त्रिवेणी का साक्षात लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को कृतार्थ करें।

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