गुरु पूर्णिमा से पहले आचार्य रामदयालजी महाराज बोले, गुरु और परमात्मा में नहीं कोई अंतर
भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आचार्य रामदयालजी महाराज ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर गुरु और परमात्मा की महिमा बताते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया।

भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित सत्संग के दौरान मंच पर विराजमान रामस्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए।
गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने गुरु और परमात्मा के स्वरूप पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु एवं गोविन्द दोनों एक ही हैं, उनमें कोई भिन्नता नहीं होती। इनमें भिन्नता करने वाले संस्कारहीन, नासमझ और अज्ञानी होते हैं। परमात्मा और गुरु दोनों ही व्यापक हैं तथा इनमें किसी भी प्रकार का अंतर करने वाले को अंततः खेद होता है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज ने इसी कारण अद्वैतवाद के सिद्धांत को स्वीकार किया है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि भारत को प्रेम, ज्ञान और मर्यादा की संस्कृति भगवान राम के रूप में मिली है और यह संस्कृति सद्गुरुओं की देन रही है। उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र की ही देन है, जिन्होंने भारत राष्ट्र को राम जैसा दिव्य तत्व प्रदान किया तथा राम जैसी मर्यादा का दर्शन कराया। उन्होंने कहा कि युग बदलते रहे, लेकिन गुरु परम्परा अखंड बनी रही। द्वापर युग में गुरु संदीपन ने शिक्षा शक्ति और गुरु दुर्वासा ने तपोशक्ति के माध्यम से भारत को ऐसी अलौकिक शक्ति प्रदान की, जिसे योगेश्वर कृष्ण के रूप में पूरे विश्व ने पूजा और सम्मान दिया। इससे हमारे गुरुओं के चिंतन की अलौकिकता का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रामस्नेही सम्प्रदाय के पावन ग्रंथ ‘अनुभव वाणी’ के प्रथम अध्याय में गुरु महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। शास्त्रों को केवल सुनने की नहीं, बल्कि समझने की आवश्यकता है। यदि गीता और अनुभव वाणी में दिए गए तत्व चिंतन को समझा जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि गुरु और गोविन्द दोनों एक हैं। उन्होंने कहा कि रामस्नेही भक्तों के मन में गुरु और गोविन्द के बीच भिन्नता का विचार कभी नहीं आ सकता।
आचार्यश्री ने कहा कि गुरु और परमात्मा एक-दूसरे में विराजमान हैं तथा दोनों में कोई अंतर नहीं है। परमात्मा संसार प्रदान करते हैं, जबकि सद्गुरु संसार से पार कराते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु भक्ति का प्रताप ऐसा है कि जो कार्य परमात्मा से नहीं होता, वह गुरु शक्ति से संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि साक्षात परमात्मा भी जब संसार में आए तो उन्होंने गुरु शक्ति को स्वीकार करते हुए दीक्षा ली और ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जिसे शिक्षा और दीक्षा के लिए सद्गुरु मिल जाए, उसका जीवन धन्य हो जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि सद्गुरु की खोज करते रहना पर्याप्त नहीं है, जब तक व्यक्ति स्वयं सद्शिष्य नहीं बनेगा, तब तक सद्गुरु की वास्तविक प्राप्ति संभव नहीं होगी।
दैनिक सत्संग में आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। वहीं, कोटा से आए संत प्रीतमरामजी ने भजन प्रस्तुत किए। प्रवचन के विश्राम के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक सत्संग का आयोजन किया जा रहा है, जबकि सुबह 8:30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
आचार्यश्री के सानिध्य में बुधवार को गुरु पूर्णिमा पर विशेष आयोजन होगा। इस अवसर पर देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से रामस्नेही श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचने लगे हैं। कार्यक्रम में प्रातः 4 बजे से पूजन, अर्चन और आरती का क्रम प्रारंभ होगा, जो पूरे दिन अनवरत चलेगा। प्रवचन उपरांत तथा संध्या आरती के बाद श्रद्धालु भजन या अपने उद्गारों के माध्यम से गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे। प्रवचन के बाद श्रद्धालु गुरु पूजा भी करेंगे। सुबह 11:30 बजे सामूहिक महाआरती आयोजित होगी, जिसमें शामिल होने वाले श्रद्धालु अपने-अपने घरों से सजी हुई आरती साथ लेकर आ सकेंगे। गुरु पूर्णिमा के इस विशेष आयोजन को लेकर माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में श्रद्धालुओं की व्यापक भागीदारी देखने को मिल रही है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
