गंगापुर। मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार ही सुख-दुख भोगता है और निष्काम भक्ति मोक्ष का मार्ग है। यह बात पंडित आनंद कृष्ण शास्त्री ने श्री बजरंग कीर्तन सांस्कृतिक कला मंडल के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित रामकथा में कही। उन्होंने कहा कि भगवान किसी को सुख-दुख नहीं देते, बल्कि मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार उनका अनुभव करता है। जीवन से मृत्यु तक मनुष्य को अपने कर्मों के आधार पर ही जीवन व्यतीत करना पड़ता है।

पंडित आनंद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जीवात्मा मोह के जाल में फंसी हुई है। जो वियोगी हैं और परमार्थ के कार्यों में लगे हुए हैं, वे मोह रूपी माया से मुक्त हैं। इसलिए मनुष्य को परमार्थ के कार्य करने चाहिए और जीवन में सुख-दुख के समय समान भाव बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी धरती पर पाप बढ़ता है, तब परमात्मा अवतार लेकर उस पाप का नाश करते हैं।

व्यासपीठ से महाराज ने निष्काम भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य की भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए। केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि केवट बड़ा चतुर था। उसने भगवान श्रीराम के चरणामृत से अपने परिवार और गांव के सभी लोगों का उद्धार कर दिया। केवट के समर्पित भाव और निर्मल मन को देखकर भगवान ने उसके हर आग्रह को पूर्ण किया। इस प्रसंग के माध्यम से महाराज ने भक्ति, समर्पण और निर्मल मन के महत्व को बताया।

श्री बजरंग कीर्तन सांस्कृतिक कला मंडल के सदस्य लादूलाल जागेटिया ने बताया कि 19 अक्टूबर को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें संपूर्ण नगरवासियों को आमंत्रित किया गया है। भंडारे की तैयारियों और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मंडल के सदस्य संभाल रहे हैं।

मंडल के सदस्य फतेहलाल लोहार, कन्हैया, ताराचंद माली, लाल लोहार, राजकुमार तेली, विकास प्रहलाद साहू, नारायण तेली, पुजारी बद्रीलाल शर्मा, हर्षवर्धन सिंह, कन्हैयालाल माली, सुरेश अग्रवाल, कैलाश लोहार और भरत तेली सहित कई अन्य सदस्य व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। स्वर्ण जयंती समारोह के तहत आयोजित रामकथा में कर्म, परमार्थ और निष्काम भक्ति का संदेश दिया गया, वहीं 19 अक्टूबर को होने वाले भंडारे के लिए नगरवासियों को आमंत्रित किया गया है।

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