गंगापुर, भीलवाड़ा। गंगापुर नगरपालिका चुनाव में नामांकन वापसी के बाद मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। कुल 75 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हैं, जबकि करीब 25 बागी उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया है। इससे भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने कई वार्डों में अपने ही खेमे से चुनौती खड़ी हो गई है।

निर्वाचन अधिकारी विवेक गुर्जर ने बताया कि नामांकन वापसी की प्रक्रिया के दौरान 23 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस लिए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बागियों के मैदान में बने रहने से कई वार्डों में चुनावी मुकाबला रोचक और कांटे का हो गया है।

नामांकन वापसी के दौरान भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने बागियों को मनाने के लिए पूरी ताकत लगाई। सुबह से देर तक रूठे दावेदारों से संपर्क, समझाइश और राजनीतिक स्तर पर मान-मनुहार का दौर चलता रहा। संगठन में पद, भविष्य में राजनीतिक जिम्मेदारी और सम्मान का भरोसा देने के साथ अलग-अलग स्तर पर दबाव बनाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन अधिकांश वार्डों में दोनों दलों की बागियों को वापस लेने की रणनीति सफल नहीं हो सकी।

अब वार्डवार चुनावी तस्वीर भी दिलचस्प हो गई है। वार्ड संख्या 4, 5, 9 और 21 में चतुष्कोणीय मुकाबला होगा। वहीं वार्ड संख्या 1, 2, 6, 7, 8, 10, 11, 14, 16, 17, 19, 20, 22 और 24 में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। वार्ड संख्या 12 में पांच उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

इसके विपरीत वार्ड संख्या 3, 13, 15, 18, 23 और 25 में आमने-सामने की सीधी भिड़ंत होगी। इन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। बाकी वार्डों में बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनावी गणित को उलझा दिया है।

सबसे बड़ा सवाल उन वार्डों को लेकर है, जहां पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उसी राजनीतिक दल से जुड़े बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं। ऐसे में वोटों का कितना बिखराव होगा, यह चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है। यदि बागी उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत प्रभाव और समर्थकों के बूते पर्याप्त वोट हासिल करने में सफल रहे तो भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

गंगापुर नगरपालिका चुनाव में अधिकांश वार्डों में बागियों की दमदार मौजूदगी ने दोनों राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। टिकट की दौड़ में पीछे रह गए दावेदार अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपने राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा लेने मैदान में उतर चुके हैं। आने वाले दिनों में यह भी स्पष्ट होगा कि कौन सा बागी किस पार्टी के प्रत्याशी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता है।

राजनीतिक रूप से इस चुनाव में दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के कई बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। टिकट वितरण से लेकर बागियों को मनाने तक जिन नेताओं ने रणनीति तैयार की, चुनाव परिणाम के साथ उनकी राजनीतिक पकड़ और संगठन में प्रभाव की भी परीक्षा होगी।

नामांकन वापसी के बाद गंगापुर नगरपालिका चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। कई वार्डों में पार्टी बनाम बागी की लड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। बागी उम्मीदवारों की मजबूती ने दोनों दलों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है और अब पार्टियों को अपने अधिकृत प्रत्याशियों के साथ-साथ बागियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी अलग रणनीति बनानी होगी।

चुनाव प्रचार शुरू होने के साथ राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है। मतदाताओं के बीच कौन उम्मीदवार अपनी पकड़ मजबूत करता है, कौन बागी अपने दम पर वोट खींचता है और किस पार्टी का संगठन अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतों को एकजुट रखने में सफल होता है, इसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई देगा।

फिलहाल 75 उम्मीदवारों का मैदान में डटे रहना, करीब 25 बागियों की मजबूत मौजूदगी और कई वार्डों में त्रिकोणीय व चतुष्कोणीय मुकाबले ने गंगापुर नगरपालिका चुनाव के समीकरणों को महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निगाहें चुनाव प्रचार पर हैं और निर्णायक सवाल यही है कि बागियों की चुनौती के बीच भाजपा-कांग्रेस के कितने अधिकृत उम्मीदवार अपनी चुनावी नैया पार लगा पाते हैं।

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