गंगापुर नगरपालिका चुनाव महासंग्राम में नामांकन वापसी के दूसरे दिन चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई। पार्टी नेताओं की ओर से अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में की गई मान-मनुहार और तमाम राजनीतिक प्रयासों के बावजूद 75 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हुए हैं। वहीं करीब 25 बागियों के मैदान में बने रहने से भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।

नामांकन वापसी के दौरान सुबह से ही भाजपा और कांग्रेस के नेता अपने-अपने रूठे कार्यकर्ताओं और बागी उम्मीदवारों को मनाने में जुटे रहे। कहीं संगठन में पद और जिम्मेदारी का भरोसा दिया गया तो कहीं भविष्य में राजनीतिक सम्मान और अवसर का आश्वासन दिया गया। अलग-अलग स्तर पर समझाइश और राजनीतिक दबाव बनाकर बागियों को नामांकन वापस लेने के लिए राजी करने की कोशिशें दिनभर चलती रहीं।

राजनीतिक मान-मनुहार के इस दौर में कुल 23 उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए सहमत कर लिया गया, लेकिन इसके बावजूद 25 बागियों का मैदान में डटे रहना दोनों प्रमुख दलों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

कांग्रेस में बागियों को मनाने के लिए विधानसभा प्रत्याशी राजेंद्र त्रिवेदी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष शंकरलाल जाट, नगर अध्यक्ष धीरज चंदेल, पूर्व पालिका अध्यक्ष दिनेश चंद्र तेली, शमशुद्दीन रंगरेज सहित अन्य नेता सक्रिय नजर आए। नेताओं ने नाराज दावेदारों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में नामांकन वापस लेने के लिए समझाने का प्रयास किया। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर चुके हैं, जिससे कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने विपक्ष के साथ-साथ अपने ही खेमे से निकली चुनौती भी खड़ी हो गई है।

वहीं भाजपा में भी बागियों को साधने के लिए पार्टी नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी। निकाय चुनाव प्रभारी एवं प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अरविंद शर्मा, अरविंद चौधरी, संजय रुईया सहित अन्य नेता दिनभर नाराज उम्मीदवारों और उनके समर्थकों से संपर्क करते नजर आए। भाजपा नेताओं की कोशिश रही कि पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को वापस संगठन की मुख्यधारा में लाया जाए, ताकि वोटों के संभावित बिखराव को रोका जा सके।

सहाड़ा, भीलवाड़ा। गंगापुर नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं और करीब 25 बागियों का मैदान में बने रहना चुनावी गणित के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वार्डों में भाजपा या कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के सामने उसी राजनीतिक दल से जुड़े बागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय होने की संभावना बन गई है।

बागी उम्मीदवार यदि अपने व्यक्तिगत प्रभाव, समर्थकों और पुराने राजनीतिक नेटवर्क के दम पर वोट हासिल करने में सफल रहे तो इसका सीधा नुकसान संबंधित पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि नामांकन वापसी के बाद दोनों दलों के रणनीतिकार अब बागियों के प्रभाव वाले वार्डों का अलग-अलग हिसाब लगाने में जुट गए हैं।

टिकट वितरण को लेकर शुरू हुई नाराजगी अब सीधे चुनावी मैदान में दिखाई दे रही है। दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पार्टी से नाराज दावेदारों को चुनाव प्रचार के दौरान किस तरह साधा जाए और उनके समर्थकों को अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में कैसे मोड़ा जाए।

अब गंगापुर नगरपालिका चुनाव का मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह गया है। कई वार्डों में राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उनके अपने ही बागी चुनौती बनकर खड़े हैं। ऐसे में बागियों को मिलने वाला वोट किस पार्टी के प्रत्याशी का खेल बिगाड़ेगा, यह आने वाले चुनाव परिणाम में बड़ा राजनीतिक सवाल बनकर सामने आ सकता है।

नामांकन वापसी के दूसरे दिन 75 उम्मीदवारों के मैदान में डटे रहने और 25 बागियों की मौजूदगी ने गंगापुर नगरपालिका चुनाव को और अधिक रोचक तथा कांटे का बना दिया है। अब आने वाले दिनों में प्रचार अभियान तेज होने के साथ बागियों की भूमिका और प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति ही तय करेगी कि चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है।

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