गंगापुर में कांग्रेस का टिकट महासंग्राम, पुराने विवादित चेहरों पर दांव से बढ़ा आक्रोश
गंगापुर नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। पुराने चेहरों पर दांव से चुनावी संकट गहराने की चर्चा है।

गंगापुर में नगरपालिका चुनाव के टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैठक कर पुराने चेहरों को दोबारा उम्मीदवार न बनाने की मांग रखी।
गंगापुर, भीलवाड़ा। गंगापुर नगरपालिका चुनाव महासंग्राम में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर घमासान तेज हो गया है। संभावित प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष और नाराजगी का माहौल है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पिछले करीब 10 वर्षों से नगरपालिका की राजनीति में सक्रिय रहे विवादित और कथित रूप से दागदार चेहरों को हटाकर नए, साफ छवि वाले और मेहनती कार्यकर्ताओं को मौका देने की मांग के बावजूद टिकट चयन में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
कार्यकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि पार्टी एक दर्जन से अधिक ऐसे पूर्व पार्षदों अथवा संभावित चेहरों को फिर से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है, जिनके पिछले कार्यकाल और राजनीतिक भूमिका को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठते रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पुराने विवादित चेहरों को दोबारा मैदान में उतारा गया तो इसका सीधा असर कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
गंगापुर नगरपालिका क्षेत्र में लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं का एक वर्ग लगातार मांग करता रहा है कि इस बार पार्टी पुराने चेहरों से आगे बढ़कर युवाओं, सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों और साफ छवि वाले नए कार्यकर्ताओं को अवसर दे। कार्यकर्ताओं का मानना है कि नगरपालिका चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि सबसे ज्यादा मायने रखती है।
इसके बावजूद टिकट चयन की प्रक्रिया में नए चेहरों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पार्टी समय रहते जनता की नब्ज पहचानने में सफल नहीं हुई तो टिकट वितरण ही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
पार्टी के भीतर असंतोष का एक बड़ा कारण नेताओं के बीच चल रही कथित खींचतान भी बताया जा रहा है। कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि कांग्रेस के कुछ नेता संगठन और पार्टी की मजबूती से ज्यादा अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हुए हैं। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि अपने प्रभाव वाले लोगों को टिकट दिलाने की कोशिश में कई विवादित चेहरों को हटाने की गंभीर पहल नहीं की गई।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि व्यक्तिगत पसंद-नापसंद और राजनीतिक गुटबाजी टिकट चयन पर हावी रही तो पार्टी को इसका नुकसान चुनाव परिणाम में उठाना पड़ सकता है। नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के सामने अब केवल भाजपा से मुकाबले की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने ही कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
टिकट वितरण से पहले ही कई दावेदार और कार्यकर्ता खुलकर असंतोष जता रहे हैं। ऐसे में यदि पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया तो बगावत, निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने और भीतरघात जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक नगरपालिका चुनाव में कुछ वार्डों में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ पार्टी के चुनाव चिन्ह से भी ज्यादा प्रभाव डालती है। ऐसे में गलत टिकट चयन कांग्रेस के लिए कई वार्डों में सीधा नुकसान साबित हो सकता है।
गंगापुर में कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी इस बार बदलाव का संदेश देगी या पिछले कई वर्षों से सक्रिय रहे चेहरों पर ही भरोसा जताएगी। यदि कांग्रेस नए और साफ छवि वाले कार्यकर्ताओं को पर्याप्त मौका देती है तो नाराज कार्यकर्ताओं को साधने के साथ-साथ जनता के बीच भी बदलाव का संदेश जा सकता है। लेकिन यदि अधिकांश पुराने और विवादों में रहे चेहरों को ही दोबारा टिकट दिया गया तो टिकट वितरण के बाद उठने वाला असंतोष कांग्रेस के लिए चुनावी नुकसान में बदल सकता है।
फिलहाल गंगापुर नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के टिकटों को लेकर कार्यकर्ताओं की निगाहें पार्टी नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। टिकट घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं की आवाज को प्राथमिकता दी या स्थानीय राजनीति में प्रभाव रखने वाले पुराने चेहरों पर ही दांव खेला।

