भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा इन दिनों प्रकृति के तीखे तेवरों और हाड़ कंपा देने वाली शीत लहर के दोहरे प्रहार से जूझ रही है। बुधवार की सुबह जब शहर की आंख खुली, तो चारों ओर सफेद धुंध की एक मोटी चादर लिपटी हुई थी। यह लगातार चौथा दिन है जब कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने न केवल जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, बल्कि आमजन को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है। विजिबिलिटी के न्यूनतम स्तर तक गिर जाने से सड़कें मानों गायब हो गईं और रफ्तार के शौकीन वाहन रेंगते हुए अपनी मंजिल तलाशते नजर आए।

सूरज की किरणों को ओझल करने वाले इस घने कोहरे का सबसे व्यापक असर परिवहन और आवाजाही पर पड़ा। तड़के से ही शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचल भी घने कोहरे की आगोश में समा गए। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल हाईवे और शहर की मुख्य सड़कों पर विजिबिलिटी लगभग शून्य के करीब पहुंच गई। वाहन चालकों को मजबूरन दिन के उजाले में भी हेडलाइट्स और इमरजेंसी इंडिकेटर्स का सहारा लेना पड़ा। मुख्य मार्गों पर बसों और ट्रकों की लंबी कतारें रेंगती हुई दिखाई दीं, जिससे काम पर निकलने वाले कर्मचारियों और दैनिक यात्रियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

इस भीषण ठिठुरन ने शहर के व्यापारिक केंद्रों और बाजारों की रौनक पर भी गहरा असर डाला है। गलन और बर्फीली हवाओं के कारण सुबह के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। कड़ाके की इस ठंड का सर्वाधिक प्रभाव समाज के उस वर्ग पर पड़ा है जो खुले आसमान के नीचे या दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह मौसम विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। शहर के विभिन्न चौराहों और रैनबसेरों के बाहर लोग अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाने की कोशिश करते देखे गए, जबकि अधिकांश आबादी ने रजाई में ही दुबके रहना मुनासिब समझा।

हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी सक्रियता दिखाई है। विभाग ने सार्वजनिक परामर्श जारी करते हुए नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और स्वयं को गर्म कपड़ों से पूरी तरह सुरक्षित रखें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गलन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए आहार और पहनावे को लेकर सावधानी अनिवार्य है।

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान भी फिलहाल राहत की ओर इशारा नहीं कर रहे हैं। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं के चलते भीलवाड़ा जिले के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में अभी और गिरावट आने की प्रबल संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक सुबह और रात के समय गलन और कोहरे का यह सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल, वस्त्रनगरी में प्रकृति के इस कड़े रुख ने विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया है और पूरा जिला अब सूरज के तीखे तेवरों और मौसम के सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story