भीलवाड़ा स्थित धांधोलाई नेहरू गार्डन में धोबी समाज सेवा संस्थान की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले भर के बसीटा धोबी समाज के प्रबुद्धजनों और प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में अनियंत्रित रूप से बढ़ रही महंगाई और समाज की आर्थिक स्थिति के बीच एक संतुलन स्थापित करना था। संस्था के अध्यक्ष किशन दशलानिया ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक व्यवसायों में उचित पारिश्रमिक न मिल पाने के कारण समाज के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस तथ्य पर विशेष बल दिया कि धोबी समाज अत्यंत पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी जीविका का एकमात्र आधार कपड़ों की धुलाई और प्रेस (इस्तरी) का कार्य है। बैठक में विशेष रूप से उन श्रमशील महिलाओं की व्यथा को प्रमुखता से उठाया गया, जो घरों में जाकर कठिन परिश्रम करती हैं। सदस्यों ने एक स्वर में वर्तमान बाजार दर और बढ़ते जीवन यापन के खर्चों को देखते हुए धुलाई, प्रेस और घरेलू श्रम की मजदूरी दरों में तर्कसंगत वृद्धि करने की आवश्यकता जताई। जिले के वरिष्ठ नागरिकों और पदाधिकारियों ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए, जिसके उपरांत समाज की एकजुटता को प्रदर्शित करते हुए सर्वसम्मति से नई और न्यायसंगत दरें निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। इस कदम का उद्देश्य न केवल समाज के आर्थिक हितों की रक्षा करना है, बल्कि पारंपरिक व्यवसाय को नई परिस्थितियों के अनुकूल सम्मानजनक स्तर प्रदान करना भी है।

Pratahkal Newsroom

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