देहरादून: बैंकों में सन्नाटा, सड़कों पर आक्रोश; 5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर आज ठप रहेंगे प्रदेश के वित्तीय पहिए
देहरादून समेत पूरे प्रदेश में 27 जनवरी 2026 को बैंकों में पूर्ण हड़ताल। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर 5-डे बैंकिंग और हर शनिवार अवकाश की मांग को लेकर 1500 से अधिक बैंक कर्मी प्रदर्शन करेंगे। बसंत विहार एसबीआई के सामने जुटेंगे कर्मचारी, जिले की 130 शाखाओं में कामकाज ठप। जानिए क्या हैं मुख्य मांगें और आम जनता पर इसका प्रभाव।

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी समेत पूरे प्रदेश में आज वित्तीय सेवाओं की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया गया है। यह सिर्फ एक कार्य बहिष्कार नहीं, बल्कि पिछले पांच वर्षों से लंबित उस मांग की गूंज है, जिसे केंद्र सरकार की चौखट पर अब तक न्याय का इंतजार है। बैंकों के ताले आज नहीं खुलेंगे और न ही काउंटरों पर कैश की खनक सुनाई देगी, क्योंकि हजारों बैंक कर्मी अपनी अस्मिता और कार्य-जीवन संतुलन की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
इस आंदोलन की मुख्य धुरी 'पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह' की वह मांग है, जिसे लेकर बैंक अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से संघर्षरत हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क सीधा और तार्किक है; जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), एलआईसी, केंद्र व राज्य सरकार के अधिकांश कार्यालय और यहां तक कि निजी क्षेत्र के बड़े प्रतिष्ठान भी सप्ताह में दो दिन के अवकाश की व्यवस्था पर चल रहे हैं, तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मियों को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है? हर शनिवार अवकाश की यह मांग भारतीय बैंक संघ (IBA) के गलियारों से होते हुए केंद्र सरकार की मेज तक तो पहुंची, लेकिन फाइलों के बोझ तले दबकर रह गई। इसी प्रशासनिक देरी ने बैंक यूनियनों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप आज प्रदेशव्यापी रोष व्याप्त है।
हड़ताल की इस ज्वाला का केंद्र देहरादून की बसंत विहार स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा बनने जा रही है। आज सुबह 10:00 बजे से ही जिले की 130 से अधिक शाखाओं के लगभग 1500 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और अधीनस्थ कर्मी इस शाखा के बाहर एकत्रित होकर अपनी एकजुटता का परिचय देंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स से संबद्ध सभी घटक संगठनों के पदाधिकारी इस विशाल सभा और प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। जिले भर के वित्तीय केंद्रों में सन्नाटा पसरा है, जिससे आम जनता के लेन-देन प्रभावित होने की पूरी संभावना है, लेकिन कर्मचारियों का मानना है कि यह सांकेतिक बलिदान उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।
यह हड़ताल केवल एक दिन का काम बंद होना भर नहीं है, बल्कि यह सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि लंबे समय से लंबित इस मांग पर केंद्र सरकार शीघ्र ही अपनी मुहर नहीं लगाती है, तो आने वाले दिनों में बैंकिंग सेक्टर में और भी तीखे आंदोलन देखने को मिल सकते हैं। आज का यह प्रदर्शन बैंक कर्मियों के उस सामूहिक असंतोष का प्रतिबिंब है, जो वर्षों की उपेक्षा के बाद अब ज्वालामुखी बनकर फूट रहा है। वित्त जगत की इस बड़ी हलचल ने न केवल व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया है, बल्कि नीतिगत सुधारों की दिशा में सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Bureau
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